पिता साईकल पर बेचा करते थे पानमसाला, जैने बेटा कैसे बना करोड़ो का मालिक -

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पिता साईकल पर बेचा करते थे पानमसाला, जाने बेटा कैसे बना करोड़ो का मालिक -

पान पराग ने इतना नाम कमाया कि 1987 में कंपनी को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया।
Feb 20, 2018, 12:47 pm ISTShould KnowAazad Staff
Pan Parag
  Pan Parag

भारत के व्यापार जगत में विक्रम कोठारी का नाम बड़े बड़े व्यपारियों में सुमार है। शुरुआत में विक्रम कोठारी के पिता मनसुख कोठारी की  पारिवार की आर्थिक स्थिति कुछ खास अच्छी नहीं हुआ करती थी। विक्रम कोठारी के पिता मनसुख कोठारी ने  शुरुआती दिनों में अपना एक कारोबार चलाया करते थेे। कानपूर में विक्रम कोटारी के पिता पानमसाला बना कर साईकिल पर घूम-घूम कर गली गली पानमसाला बेचा करते थे।

धीरे-धीरे बाजार में इसका कारोबार बढ़ता चला गया। फिर क्या था इस मसाले को एक नई पहचान मिली जिसे आज दुनिया  'पान पराग' के नाम से जानती है। इस दौरान  कोठारी ग्रुप का बिजनेस नई ऊंचाई पर पहुंचा तो बंटवारा हो गया।

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पारले प्रोडक्ट का डिस्ट्रिब्यूशन भी लिया
पानपराग की लगातार सफलता के बाद 60 के दशक में कोठारी परिवार ने पारले प्रोडक्ट की कानपुर क्षेत्र का डिस्ट्रिब्यूशन लिया, इससे परिवार को आर्थिक तौर पर मजबूती मिली. इस बीच, कानपुर शहर में पान मसाला का पहला ब्रैंड 'बादशाह पसंद' बंद हो गया. इसके बाद 'पान बहार' को टक्कर देने के लिए बाजार में 'पान पराग' उतारा गया. पान मसाला खाने के शौकीन लोगों के बीच पान पराग को बेहद पसंद किया गया है. 70 के दशक की शुरुआत में 5 रुपए में 100 ग्राम मिलने वाले पान मसाले ने बाजार में खूब धूम मचाई।

धीरे धीरे उद्दोग जगत में और इजाफा हौता चला गया कंपनी ने रोटोमैक स्टेस्नरी खोली। जिस पसंद भी कई गया।

एम एम कोठारी ने 18 अगस्त 1973 को "पान पराग" पान मसाला कंपनी का शुभारंभ किया था। 1983 में कोठारी प्रोडक्ट्स प्राइवेट के रूप में शुरुआत हुई। 1983 से1987 के बीच "पान पराग" एकल सबसे बड़ा टीवी पर विज्ञापनदाता और मेघाब्रांड कंपनी बन गई। उस समय कंपनी की टक्कर में इतनी बड़ी विज्ञापन दाता कोई कंपनी नहीं थी। बहरहाल पिता द्वारा चलाी गई कंपनी का कारोबार काफी अच्चा चल रहा था लेकिन पिता (मनसुख कोठारी)की मृत्यु के बाद मानों इस कारोबार को किसी की नजर लग गई।

मनसुख कोठारी के बेटों के बीच हुआ बटवारा-

दीपक कोठारी और विक्रम कोठारी के बिच बंटवारा उनके पिता एमएम कोठारी के जाने के बाद हुआ। कोठारी ब्रदर्स ने तय किया पान पराग और रोटोमैक दो हिस्सों में बटेगा।

विक्रम कोठारी ने स्टेशनरी बिजनेस को अपनाया तो वहीं दीपक ने पान मसाला बिजनेस को संभाले रखा। ऐसा नहीं है कि विक्रम कोठारी को सबकुछ संपत्ति के बतौर मिला हो। उन्होंने बराबर मेहनत की और अपनी कंपनी रोटोमैक ग्रुप को बड़ा नाम दिया। इसके लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें सम्मानित भी किया। सम्मान के ऐसे कई मौके उनके जीवन में भी आए।

दीपक कोठारी ने कोठारी प्रोडक्ट्स फ्लैगशिप में 22.5 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी खरीदी ली। दीपक ने इसके लिए भाई विक्रम को शेयर के पैसे दे दिए। इसके बाद विक्रम कोठारी ने रोटोमैक इंडस्ट्री में कदम जमाया जिसमें उन्होंने पेन, स्टेशनरी और ग्रीटिंग्स कार्ड्स इत्यादी बनाने चालू किए।

विक्रम कोठारी पर 800 करोड़ बैंक घोटाला व धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। हाल ही में विक्रम कोठारी के आवास पर ईड़ी ने छापेमारी की है साथ और उनकी सम्मपत्ती को जब्त भी किया है। कोठारी पर पांच हैकों को चूना सलगाने का आरोप है।

विक्रम कोठारी पर अब तक इन बैंक से कर्जा लेने का आरोप है इनमें-
 
इंडियन ओवरसीज बैंक- 1400 करोड़
बैंक ऑफ इंडिया- 1395 करोड़
बैंक ऑफ बड़ौदा- 600 करोड़
इलाहाबाद बैंक- 352 करोड़

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