Tuesday, Jun 16, 2026 | Last Update : 01:24 AM IST
यह एक ऐसा मनमाना प्रावधान है, जिसके तहत अपराध हुआ नहीं और पुलिस के मुताबिक ये कहा जाता है कि अपराध किया जा सकता था। इस प्रावधान के चलते कभी भी, किसी को भी गिरफ्तार करके हवालात में बन्द कर देना पुलिस के बायें हाथ का खेल है। आजादी से पहले यह कानून अंग्रेजों द्वारा उनके विरुद्ध आवाज उठाने वाले भारतीयों को कुचलने के लिये बनाया गया था, लेकिन दण्ड प्रक्रिया संहिता में इसे आज भी स्थान दिया गया है। बता दें कि ये धारा अंग्रेजों के समय से ही हमारे संविधान का एक हिस्सा है जिसे आज भी लागू किया जाता है।
एसडीएम बाफना के अनुसार धारा 151 में पुलिस गलत इस्तागासा लगाती है, जबकि कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष आरोपी को तब ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए जब अारोपी धारा 151 (2) में गिरफ्तार हुआ हो और आरोपी को 24 घंटे से अधिक पुलिस अभिरक्षा में रखना आवश्यक हो तो किसी विधि अथवा संहिता के उपबंधों के अधीन प्राधिकृत करना होगा, तब धारा 151, 107 व 116 में पुलिस कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समझ आरोपी को पेश कर सकती है।
-वहीं 2010 में संशोधित हुए कानून के माध्यम से यह भी बताया कि धारा 151 में गिरफ्तार आरोपी को कार्यपालक मजिस्ट्रेट के पास भेजा जा रहा है। जहां से जेल भेज दिया जाता है। जबकि 151 में किसी भी आरोपी को जेल भेजना अवैधानिक तो है ही जेल संचालक को भी जेल में रखने का अधिकार नहीं है।
यह धारा शांतिभंग की आशंका में इस्तेमाल की जाती है। यदि मारपीट के मामलों में चिकित्सीय परीक्षण में गंभीर प्रकृति की चोट या हथियार के इस्तेमाल की बात आती है तो सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर फिर से गिरफ्तारी होती है।
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कहा लगाई जाती है धारा 151
दो पक्षों में मनमोटाव के दौरान
चुनावी घोषणा के दौरान जब ये लगे कि हिंसा भड़ सकती है
कहीं भी शांति व्यवस्था भंग करने के दौरान
मारपीत के दैरान
कभी-कभी इस धारा के तहत गांव के गांव मजिस्ट्रेट के सामने भेज दिए जाते हैं।
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