मजीठिया को लेकर पत्रकारों की लड़ाई रंग लाई, जाने क्या है मजीठिया वेज बोर्ड

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मजीठिया को लेकर पत्रकारों की लड़ाई रंग लाई, जाने क्या है मजीठिया वेज बोर्ड

सबसे पहले इंडियन एक्सप्रेस की यूनियन ने अगस्त 2014 में अवमानना याचिका दायर की थी।
Jul 3, 2018, 11:49 am ISTShould KnowAazad Staff
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पत्रकारों के वेतन से जुड़ी लड़ाई लम्बे समय से चल रही है और आखिकार पत्रकारों के वेतन से जुड़ी लड़ाई रंग लाई।उच्चतम न्यायालय ने कहा कि कर्मचारियों को नया वेतन अप्रैल, 2014 से मिलेगा और नियोक्ता को 1 साल के भीतर 4 किस्तों में बकाया राशि का भुगतान करना होगा। न्यालय ने मजीठिया की इस सिफारिश को वैद ठहराते हुए इस पर लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए इसे उचित करार दिया है।

इसके साथ ही इस सिफारिशों को चुनौती देने वाली विभिन्न समाचार-पत्रों के प्रबंधकों की याचिकाएं को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया है। गौरतलब है कि न्यायालय ने इसे जनवरी 2018 में कई समाचार-पत्रों की याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला की तारीख को आगे बढ़ा दिया था।

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क्या है मजीठिया वेज बोर्ड ?

मजीठिया वेज बोर्ड समाचार पत्रों में कार्य कर रहे पत्रकारों-गैर पत्रकारों के लिए केंद्र सरकार की ओर से हर दस वर्ष में गठित किया जाने वाला वेतन आयोग है।  इस वेज बोर्ड की सिफारिशें सभी पक्षों की सुनवाई करने बाद जस्टिस जी. आर. मजीठिया ने भारत सरकार को सौंपी। इसे 11 नवम्बर 2011 को अधिसूचित कर दिया गया।

बता दें कि श्रम मंत्रालय ने समाचार पत्र उद्योग की आपत्तियों के बावजूद 2007 में मजीठिया वेतन बोर्ड का गठन किया था और इसके बाद जनवरी, 2008 से कर्मचारियों को मूल वेतन का 30 फीसदी तदर्थता के आधार पर अंतरिम राहत देने की घोषणा की गई थी। भारी वित्तीय बोझ के बावजूद समाचार-पत्र उद्योग ने इसे लागू किया था।

जब यूपीए सरकार सत्ता में थी तो उसने पत्रकारों के वेतन को पुनः निर्धारण के लिए मजीठिया वेज बोर्ड गठित किया था। बोर्ड पूरे देश भर के पत्रकारों और मीडिया कर्मियों से बातचीत कर सरकार को अपनी सिफ़ारिश भेजी थीं।तत्कालीन मनमोहन सिंह की सरकार ने इन सिफ़ारिशों को मानते हुए, इसे लागू करने के लिए अधिसूचना जारी की थी। लेकिन अख़बार मालिकों ने इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और फ़रवरी 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे लागू करने के आदेश पर मुहर लगा दी। कोर्ट ने अप्रैल 2014 से एरियर और नए मानदंडों पर वेतन और एक साल के अंदर एरियर देने का आदेश दिया लेकिन जब संस्थानों ने इसे लागू नहीं किया तो कर्मचारी अवमानना की याचिका लेकर फिर उसी अदालत में पहुंच गए। इस मामले में विभिन्न अख़बारों और समाचार एजेंसियों के कर्मचारियों की ओर से कुल 83 याचिकाएं आईं, जिनमें क़रीब 10,000 कर्मचारी शामिल थे।

बहरहाल मजीठिया के कारण कई संस्थानों में ऐसी स्थिती हो गई की कई कार्मचारियों का वेतन के आभाव में स्थानांतरण (ट्रस्फर) कर दी गया। तो कई संस्थानों में कर्माचारियों के नए सीरे से अकाउनंट खुले जाने लगे।

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