बाबा आमटे एक ऐसे व्यक्ति जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के लिए समर्पित कर दिया

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बाबा आमटे एक ऐसे व्यक्ति जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के लिए समर्पित कर दिया

बाबा आमटे के 104वें जन्म दिन पर गूगल ने डूडल बना कर उन्हें श्रद्धांजली दी है। गूगल ने अपने डूडल में एक स्लाइड शो तैयार किया है जिसमें पांच फोटो शामिल की गई हैं। इन सभी फोटो में बाबा आमटे की ओर से की गई समाजसेवा, उनके जीवन दर्शन और कुष्ठरोगियों के लिए किए गए कार्यों को दिखाया गया है।
Dec 26, 2018, 11:32 am ISTShould KnowAazad Staff
Baba Amte
  Baba Amte

समाजसेवी बाबा आमटे की आज 104वीं जयंती है।बाबा आमटे एक समाजसेवी थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के लिए समर्पित कर दिया था। बाबा आमटे  ने कुष्ठ रोगियों, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई मुद्दों पर आवाज उठाई थी जिनमे वन्य जीवन संरक्षण और नर्मदा बचाओ आंदोलन भी शामिल था।

बाबा आमटे का जन्म 26 दिसम्बर 1914 को महाराष्ट्र के वर्धा जिले में एक संपन्न परिवार में हुआ था। उन्होंने एमए एलएलबी तक की पढ़ाई की, लेकिन शुरुआत से ही उनका मन गरीबों के लिए धड़कता था। इसलिए बाबा आमटे ने कोई नौकरी करने के बजाए महात्मा गांधी और विनोबा भावे से प्रभावित होकर पूरे भारत का दौरा कर देश के गांवों में जीने वाले लोगों की समस्याओं को समझने की कोशिश की। इतना ही नहीं उन्होंने देश की आजादी की जंग में भी अहम भूमिका निभाई थी।

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बाबा आमटे  ने 30 साल की उर्म में समाजसेवा शुरू कर दी थी इस दौरान उन्होंने अपनी वकालत की पढ़ाई छोड़  दी थी। समाज सेवा उन्होंने तब शुरू की, जब वे एक कुष्ठ रोग के व्यक्ति से मिले थे और इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा में लगा दिया था।

बाबा आमटे जो एक बेहद संपन्न घराने से ताल्लुक रखते थे उन्होंने जिंदगी के सारे ऐशो-आराम छोड़ गरीबों, दुखियों और कुष्ठ रोगियों की जिंदगी संवारने में लगा दी।  जिन कुष्ठ रोगियों को भारतीय समाज में अछूत की निगाहों से देखा जाता है उन्हें बाबा आमटे ने दिल से लगाया।

बाबा आमटे ने कुष्ठ रोगियों के लिए एक आश्रम की स्थापना की जिसका नाम आनंद वन है आज भी इस आश्रम में आने वाले रोगियों का मुफ्त में इलाज किया जाता है।  इसके अलावा भी बाबा ने कई आश्रम की स्थापना की जैसे सोमनाथ, अशोक वन आदि शामिल है। इन आश्रमों में रोगियों की सेवा की जाती है और उन्हें रोगी से सच्चा कर्म योगी बनाया जाता है।

बाबा ने 72 साल की उर्म में मार्च 1985 में निट इंडिया अभियान का ऐलान किया था। बाबा आम्टे ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक की यात्रा पैदल की थी। इस पैदल यात्रा के दौरान बाबा के साथ 100 पुरुष के साथ 16 महिलाएं शामिल थी, जिनकी उर्म करीब 35 साल से कम थी। उनकी इस यात्रा का लक्ष्य था कि लोगों को एक भारत के लिए प्रेरित किया जा सके।

भारत के विख्यात समाज सेवक बाबा आमटे का निधन 9 फरवरी 2008 को आनंदवन (महाराष्ट्र) में हुआ था।

कई पुरस्कार से किया जा चुका है सम्मानित

बाबा आमटे ने अपना पूरा जीवन समाज के लिए समर्पित कर दिया था। जिसे देखते हुए, उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा जा चुका है।

बाबा आम्टे युनाइटेड नेशन अवार्ड से भी उन्हे नवाजा गया था।

साल 1999 में उन्हें गांधी पीस अवार्ड भी सम्मानित किया जा चुका है।

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