Sunday, Jun 21, 2026 | Last Update : 04:52 AM IST
सुप्रीम कोर्ट ने उज्जैन के महाकाल ज्योतिर्लिंग को नुकसान से बचाने के लिए मंदिर प्रबंधन की तरफ से दिए गए सुझावों पर मुहर लगाते हुए आदेश दिया है कि शिवलिंग पर RO का ही पानी चढ़े. इसके साथ ही अदालत ने प्रति श्रद्धालु दूध और दूसरी पूजन सामग्री की सीमा सीमित करने का फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रखते समय साफ किया था कि पूजा कैसे हो, ये तय करना कोर्ट का काम नहीं है. बल्कि अदालत ने सिर्फ शिवलिंग को नुकसान से बचाने पर सुनवाई की। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा था कि भस्म आरती कैसे होगी यह हम तय नहीं कर सकते हैं। मंदिर की पूजा पद्धति में हम किसी तरह का दखल नहीं देंगे।
-कोर्ट शिवलिंग को सुरक्षित और संरक्षित रखने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन समिति को वह नोटिस बोर्ड तुरंत हटाने के लिए कहा था जिसमें लिखा था कि कोर्ट के निर्देश पर पूजा के नियम बताए गए हैं।
इसके साथ ही कोर्ट ने इस बात को भी साफ किया है कि उसका मंदिर और पूजा के रीति-रिवाजों से कोई लेना-देना नहीं है। कोर्ट यह मामला केवल शिवलिंग को सुरक्षित रखने के लिए सुन रहा है और इसके लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई है। जिसकी रिपोर्ट के आधार पर मंदिर प्रबंधन समिति ने यह प्रस्ताव पेश किए थे।
गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि आरओ के पानी से महाकाल शिवलिंग का अभिषेक किया जाना चाहिए। इससे पहले इस पर फैसला होना था कि अभिषेक के लिए पंचामृत (दूध, दही, शहद, शकर और घी) से अभिषेक हो या नहीं और कितनी मात्रा में हो।
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