Sunday, Jun 21, 2026 | Last Update : 12:08 PM IST
सुप्रीम कोर्ट आज इच्छा मृत्यु यानी पैसिव यूथेनेशिया पर अपना फैसला सुनाएगी। बता दें कि 'पैसिव यूथेनेशिया' (इच्छामृत्यु) वह स्थिति है जब किसी मरणासन्न व्यक्ति की मौत की तरफ बढ़ाने की मंशा से उसे इलाज देना बंद कर दिया जाता है।
चीफ जस्टि दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने पिछले साल 11 अक्टूबर को इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। पांच जजों की बेंच आज इस बात पर फैसला सुनाएगी कि क्या किसी व्यक्ति ऐसी लिविंग विल को मान्यता दी जानी चाहिए, जिसमें वह अग्रिम रूप से बयान जारी कर यह निर्देश दे सकता है कि उसके जीवन को वेंटिलेटर या आर्टिफिशल सपॉर्ट सिस्टम पर लगाकर लंबा नहीं किया जाए।
-आपको बता दें कि 'लिविंग विल' एक लिखित दस्तावेज होता है जिसमें कोई मरीज पहले से यह निर्देश देता है कि मरणासन्न स्थिति में पहुंचने या रजामंदी नहीं दे पाने की स्थिति में पहुंचने पर उसे किस तरह का इलाज दिया जाए।
कोर्ट इस मामले में पर्याप्त सेफगार्ड देगा ताकि इसका दुरुपयोग न हो. वहीं केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर कहा कि इच्छा मृत्यु पर अभी सरकार सारे पहलुओं पर गौर कर रही है और इस मामले में सुझाव भी मांगे गए हैं।
इस मामले में वकील प्रशांत भूषण की ने कहा है कि अगर ऐसी स्थिति आ गई कि व्यक्ति बिना सपोर्ट सिस्टम के नही रह सकता तो ऐसे में डॉक्टर की एक टीम का गठन किया जाना चाहिए जो ये तय करे कि क्या बिना कृत्रिम सपोर्ट सिस्टम वो बच सकता है या नहीं क्योंकि ये मेरा अधिकार है कि मैं कृत्रिम सपोर्ट सिस्टम लेना चाहता हूं या नही।
आपको बता दें कि फरवरी 2015 में इच्छा मृत्यु से संबंधित याचिका को संवैधानिक खंडपीठ के पास भेजा था जिसमें ऐसे व्यक्ति की बात की गई थी जो गंभीर बीमारी से जूझ रहा है और मेडिकल ऑपनियन के मुताबिक उसके बचने की संभावना नहीं है।
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