Sunday, Jun 21, 2026 | Last Update : 03:04 PM IST
तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच 120 सालों से चल रहे कावेरी जल विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट फ़ैसला सुना सकती है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने 20 सितम्बर 2017 को कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल की तरफ से दायर अपील पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था।
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आने वाले फैसले को लेकर बेंगलुरु में कड़ी सुरक्षा के इंतजाम किए गए है।सुरक्षा की दृष्टि से 15000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा. इसके अलावा कर्नाटक राज्य के पुलिस कर्मी और अन्य सुरक्षाबालों को तैनात किया जा रहा है।
-गौरतलब है कि कावेरी जल वीवाद को लेकर साल 2007 के फरवरी महीने में जल बटवारे को लेकर चुनौती दी गई थी।जिसे सीडब्ल्यूडीटी ने ये फैसला कावेरी बेसिन में जल कि मौजूदगी को देखते हुए लिया था।
कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक दावा करता है कि ब्रिटिशर्स के जमाने में कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच जो समझौता हुआ, उसमें उसके साथ न्याय नहीं हुआ क्योंकि इस समझौते में उसे उसका पानी का उचित हिस्सा नहीं दिया गया. कर्नाटक यह भी कहता आया है कि वह नदी के बहाव के रास्ते में पहले पड़ता है इसलिए उसका जल पर पूरा अधिकार बनता है।
वहीं इस मामले में तमिलनाडु का मानना है कि उसे समझौते के मुताबिक, कावेरी जल का उतना ही हिस्सा मिलते रहना चाहिए. उसे कावेरी जल की अधिक मात्रा की जरूरत है क्योंकि खेती के लिए किसानों को पर्याप्त जल उपलब्ध कराने को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही तमिलनाडु का कहना है कि ट्रिब्यूनल ने ग़लती से कर्नाटक को 270 टीएमसी फीट पानी आबंटित किया था, जिसे कम कर 55 टीएमसी किया जाना चाहिए और तमिलनाडु को और अधिक जल दिया जाना चाहिए।
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