Saturday, Jun 20, 2026 | Last Update : 04:37 AM IST
दहेज उत्पीड़न क़ानून (498 A) पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फ़ैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों में गिरफ्तारी हो या नहीं ये तय करने का अधिकार पुलिस को दे दिया है। हालांकि इससे पहले महिला की शिक़ायत पर उसके पति और ससुराल वालों की गिरफ़्तारी का फैसला परिवार कल्याण समिति' करती थी। बहरहाल कोर्ट ने आज अपने इस फैसले को ख़ारिज कर दिया है।
बता दें कि पिछले साल 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के दो जजों, जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस उदय उमेश ललित ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए अहम निर्देश दिए थे। इसमें 498-ए के तहत महिला की शिक़ायत आने पर पति और ससुराल वालों की तुंरत गिरफ़्तारी पर रोक लगाई गई थी।
-हालांकि कोर्ट ने ये भी कहा था कि इस समिति की रिपोर्ट को मानना शिक़ायत की जाँच कर रहे अफ़सर या मजिस्ट्रेट पर लाज़िमी नहीं होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा था कि विदेश में रहने वालों का पासपोर्ट आमतौर पर ज़ब्त नहीं किया जाएगा । इन मामलों में वीडियो कॉन्फ़्रेंस के ज़रिए भी पेशी की जा सकती है।
बहरहाल इस कानून में 2017 को किए गए संशोधन का मकसद महिलाओं को इंसाफ दिलाना था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के चलते देश भर में दहेज उत्पीड़न के मामलों में गिरफ्तारी बंद हो गई। जिसके बाद आज कोर्ट ने इस फैसले को एक बार फिर से पुलिस को सौंप दिया है।
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