लोहड़ी उत्तर भारत का प्रसिद्ध त्योहार जो मकर संक्राति से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है।

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लोहड़ी उत्तर भारत का प्रसिद्ध त्योहार जो मकर संक्राति से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है।

लोहड़ी को दुल्ला भट्टी की एक कहानी से भी जोड़ा जाता हैं। लोहड़ी के गानों का केंद्र बिंदु दुल्ला भट्टी को ही बनाया जाता हैं।
Jan 13, 2018, 3:01 pm ISTNationAazad Staff
Lohadi
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भारत एक ऐसा देश जहां हर धर्म के त्योहारों को धूमधाम से मनाया जाता है। यहां साल साल की शुरूआत लोहड़ी और मकर संक्राति के त्योहार से की जाती है। ये त्योहार देश के अलग-अलग हिस्से में अलग-अलग ढंग से मनाया जाता है।

लोहड़ी त्योहार की धूम-  

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लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध त्योहार है। यह त्यौहार पंजाबियों तथा हरियाणवियों लोगों का प्रमुख त्यौहार माना जाता है। इस त्योहार को पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू काश्मीर और हिमांचल में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता हैं। इस त्योहार को मनाने का तरिका काफी शानदार होता है। लोहड़ी की रात को खुली जगह पर आग का अलाव जलाया जाता है जहां परिवार और आस-पड़ोस के लोग मिलकर आग के किनारे घेरा बना कर बैठते हैं।

इस त्योहार में  अग्नि को प्रमुख देवता माना जाता हैं। रेवड़ी, मूंगफली, लावा, गजक आदि अग्नि को चढ़ाई जाती है और प्रसाद के तौर पर लोगों को बांटे जाते हैं। इस त्योहार को मनाने के पिछे हमारी संस्कृती और परंपरा भी छीपी है। माना जाता है कि किसान अपने उगाए गए अनाजों की पहली फसल इस त्योहार के द्वारा अगनी देवता को अर्पण करते है।

पंजाबियों का मुख्य त्योहार-

लोहड़ी त्योहार का त्योहार पंजाबी लोग बड़े उमंग के साथ पारंपरिक वेशभूषा में ढोल नगाड़े की थाप पर डांस करते है। पंजाबी लड़कियां गिद्दा करती हैं तो लड़के भागड़े में मस्त हो जाते हैं। और एक-दूसरे का लोहड़ी की बधाईयां देते हैं।

पंजाबी लोग इस त्योहार को विशेष रूप से मनाते हैं. जिनके घर में नई शादी या कोई लड़का पैदा होता है उसकी पहली लोहड़ी विशेष पर्व के तौर पर मनाई जाती हैं।

लोहड़ी को दुल्ला भट्टी की एक कहानी से जोड़ा गया है-

दुल्ला भट्टी मुग़ल शासक अकबर के समय में पंजाब में रहता था. उसे पंजाब के नायक की उपाधि से सम्मानित किया गया था. कहा जाता है कि दुल्ला भट्टी ने पंजाब की लड़कियों की रक्षा की थी. क्योंकि उस समय अमीर सौदागरों को सदंल बार की जगह लड़कियों को बेचा जा रहा था। दुल्ला भट्टी ने एक योजना के तहत लड़कियों को न केवल मुक्त ही करवाया बल्कि उनकी शादी की हिन्दू लडको से करवाई और उनके शादी के सभी व्यवस्था भी करवाई।

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