Saturday, Jun 20, 2026 | Last Update : 08:06 PM IST
दिल्ली में पढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए कई तरह-तरह के कानून बनाए गए जिसे काफी हद तक लागू भी किया गया लेकिन इसके बावजूद पदूषण के स्तर में कुछ खास गिरावट देखने को नहीं मिली। जिसका सबसे मुख्य कारण है पड़ो की कटाई। दक्षिणी दिल्ली में 16 हजार 500 पेड़ों की कटाई का मामला साननमे आया है। यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में पहुंचने के बाद अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में भी पहुंच गया है।
मिली जानकारी के मुताबिक एनजीओ के अध्यक्ष अनिल सूद की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि कई कॉलोनियों के निर्माणके लिए पेड़ों की कटाई वृहद स्तर पर किए जाने से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ जाएगा। करीब 20 हजार पेड़ों में से साढ़े 16 हजार पेड़ों को काटे जाने के कारण ऑक्सीजन की कमी हो जाएगी। वातावरण पर इसका अचानक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। रिडेवलपमेंट के नाम पर 32 हजार 835 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस कार्य को पांच वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा।
-याचिका में उन्होंने बताया है कि सरोजनी नगर से 11 हजार, नारौजी नगर से 1465, नेताजी नगर से 3033 और कस्तूरबा नगर से 520 पेड़ों को काटा जाना है, जबकि इस क्षेत्र में कुल 19 हजार 976 पेड़ हैं। बता दें कि दिल्ली में 9 लाख पेड़ों की कमी है। जो प्रदूषण के स्तर को और अधिक बढ़ावा दे रही है।
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