बाबा रामदेव पर लिखी किताब की बिक्री और प्रकाशन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई रोक

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बाबा रामदेव पर लिखी किताब की बिक्री और प्रकाशन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई रोक

योग गुरु बाब रामदेव पर लिखी गई एक किताब की बिक्री और प्रकाशन पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। इस किताब को लेकर ये दावा किया गया है कि इसमें मानहानिजनक सामग्री है। जो लोगों पर गलत प्रभाव डाल सकती है।
Oct 1, 2018, 10:44 am ISTNationAazad Staff
Baba Ramdev
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने जाने माने योग गुरु बाबा रामदेव पर लिखी गयी ‘‘गॉडमैन टू टायकून' नामक किताब की बिक्री और प्रकाशन पर रोक लगा दी है। जिसमें दावा किया गया है कि इसमें मानहानिजनक सामग्री है। बता दें कि कोर्ट में इस किताब को लेकर ये याचिका दायर की गई थी कि यह किताब कथित तौर पर रामदेव के जीवन से जुड़ी है जिसमें अपमानजनक सामग्री है और इससे उनके आर्थिक हित के साथ उनकी छवि को नुकसान पहुंच सकता है। इस किताब से लोगों में नकारात्मक संदेश जाएगा। बता दें कि यह किताब पत्रकार प्रियंका पाठक नारायण ने लिखी है।

कोर्ट में दायर इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने कहा कि ‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत" किसी व्यक्ति के ‘‘बोलने एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की कीमत पर' किसी अन्य व्यक्ति के सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार को सूली पर नहीं चढ़ाया जा सकता।

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अदालत ने कहा कि दोनों को संतुलित करना होगा ताकि किसी व्यक्ति के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचे और पहले चूंकि इसी मुद्दे पर किताब प्रकाशित हो चुकी है लेकिन इसे फिर से प्रकाशित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि प्रथमदृष्ट्या इसमें उनके खिलाफ आक्षेप हैं। बहरहाल उच्च न्यायालय ने किताब की बिकरी और प्रकाशन पर रोक लगाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति के बारे में किताब लिखी गई है वह ‘‘जीवित व्यक्ति' है जो सम्मानजनक व्यवहार का हकदार है।

बता दें कि इस मामले में योग गुरु बाब रामदेव ने निचली अदालत के फैसले को दरकिनार करने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसने किताब के प्रकाशन और बिक्री पर प्रतिबंध हटाने के आदेश दिए थे। जिसके अतिरिक्त बाद सिविल न्यायाधीश ने पिछले वर्ष अगस्त में प्रकाशक जगरनॉट बुक्स को अगले आदेश तक किताब के प्रकाशन और बिक्री पर रोक लगा दी थी। इसने अमेजन इंडिया और फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राईवेट लिमिटेड को किताबों की ऑनलाइन बिक्री पर भी रोक लगा दी थी। इस किताब पर इस वर्ष 28 अप्रैल को अतिरिक्त वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश ने प्रतिबंध को हटा दिया था। बहरहाल एक बार फिर से इस किताब की बक्री और प्रकाशन पर रोक लगा दी गई है।

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