Sunday, Jun 21, 2026 | Last Update : 05:56 PM IST
आधार मामले में सुप्रीम कोर्ट में संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वालों से जानना चाहा कि नेटवर्किंग की इस दुनिया में एक व्यक्ति का आधार नंबर कैसे अंतर पैदा कर सकता है जबकि निजी संस्थाओं के पास ये आंकड़ा पहले से ही उपलब्ध है.
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ के एक सदस्य न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हो रहे वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान एवं कपिल सिब्बल से पूछा, “हमारा डाटा निजी कंपनियों के पास मौजूद है। इसके बावजूद क्या आधार संख्या के इस्तेमाल से कुछ और अधिक फर्क पड़ जायेगा?”
-शीर्ष अदालत ने ये भी कहा कि आधार रजिस्ट्रेशन प्रोसेस के दौरान जमा की गयी बायोमेट्रिक सूचना केन्द्रीय डाटाबेस में जमा की गयी थी और नागरिकों को पहचान के मकसद से सिर्फ 12 अंकों वाली विशिष्ट संख्या दी गयी थी।
पीठ इस समय आधार योजना और इससे संबंधित 2016 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। बहरहाल इस रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में करीब 49,000 प्राइवेट एजेन्सियों को सरकार ने पिछले साल ब्लैक लिस्ट में डाल दिया था। जिसने नागरिकों के बायोमेट्रिक सहित इन आंकड़ों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच इस समय आधार योजना और इससे संबंधित 2016 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
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