Tuesday, Jun 16, 2026 | Last Update : 04:06 AM IST
भगवान गणेश का सबसे उत्तम फल देनेवाला व्रत संकष्टी चतुर्थी कई मायनों से खास माना जाता है। वैसे तो गणेश चतुर्थी के बाद भगवान गणेश का ये त्यौहार काफी धूमधाम से मनाया जाता है। महिलाएं अपने बच्चों की सफलता की कामना के लिए इस व्रत को करती हैं।
माना जाता है कि इस व्रत को करने से सुख समृद्धि और सौभाग्य की प्रप्ती होती है। इसके साथ ही भगवान गणेश हर संकट को दूर करते है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता भी कहते हैं क्योंकि वो अपने भक्तों के सारे कष्ट और विघ्नों को दूर करते हैं।इस तिथि को तिल चतुर्थी, माघी चतुर्थी, माघ संकष्टी चतुर्थी, तिल चौथ या सकट चौथ के नाम से भी जाना जाता है।
-पूजा करने की विधी
माघ संकष्टी चतुर्थी को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद भगवान गणेश की पूजा करते समय अपना मुंह उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ रखें। भगवान गणेश की पूजा में मोदक का भोग लगाने के साथ साथ भगवान गणेश की पूजा में तिल के लड्डू भी चढ़ाए। मोदक के अलावा दुर्वा, पुष्प, रोली, फल सहित पंचामृत को भी पूजन में शामिल करें।
इस दिन संकष्टी चतुर्थी को भगवान गणपति की आरती जरूर करनी चाहिए। इसके साथ ही संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा जरूर सुननी चाहिए। वहीं इस दिन भगवान की पूजा के वक्त ॐ गणेशाय नम: या ॐ गं गणपतये नम: मंत्र का जाप करना चाहीए।
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