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जयपुर, 08 नवंबर, 2020: श्री जगदीशप्रसाद झाबरमल टिबरेवाला विश्वविद्यालय ने डॉ. (ब्रिगेडियर) सुरजीतसिंह पाब्ला को प्रो-चेयरपर्सन नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति जेजेटी विश्वविद्यालय, झुंझुनू को राजस्थान के सबसे बड़े और सबसे जीवंत ग्रामीण शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करने के लिहाज से की गई है। हाल ही में डॉ. (कर्नल) नागराज मन्था भी प्रेसीडेंट के तौर पर जेजेटी विश्वविद्यालय में शामिल हुए हैं। डॉ. (कर्नल) नागराज मन्था ने आईआईटी खड़गपुर से एम. टेक. और आईआईटी रुड़की से पीएच. डी. की उपाधि हासिल की है। वह 25 वर्षों से अधिक समय से भारतीय सेना की सेवा कर रहे हैं और पूरे देश में कई विश्वविद्यालयों में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
ब्रिगेडियर पाब्ला भारत सरकार के आॅल इंडिया बोर्ड फॉर वोकेशनल एजुकेशन - एआईसीटीई के भी अध्यक्ष रहे हैं। अनेक इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और अकादमिक प्रशासन में अपने व्यापक अनुभव के साथ, डॉ पाब्ला का उद्देश्य छात्रों को गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान से युक्त शिक्षा प्रणाली के साथ जोड़ना है, ताकि शिक्षा प्रणाली में भी सकारात्मक बदलाव को संभव बनाया जा सके।
-डॉ. (ब्रिगेडियर) सुरजीतसिंह पाब्ला एम.टेक के साथ मैकेनिकल इंजीनियर हैं और उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से पीएच.डी. की उपाधि भी हासिल की है। डॉ. पाब्ला ने देशभर में अनेक विश्वविद्यालयों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे पांच विश्वविद्यालयों में कुलपति, एक विश्वविद्यालय के प्रो वीसी और दो प्रौद्योगिकी संस्थानों के निदेशक के रूप में भी अपना योगदान दे चुके हैं। सेना की इकाइयों के अलावा सेना में उनके अनुभव में इंजीनियरिंग व्यावसायिक कार्य और प्रशासन का अनुभव भी शामिल है।
जेजेटी विश्वविद्यालय की स्थापना 2009 में की गई थी और आज विश्वविद्यालय का मकसद दुनियाभर मंे तेजी से उभरती हुई औद्योगिक जरूरतों, कारोबारी अवसरों और रिसर्च संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को व्यावहारिका ज्ञान प्रदान करना है। जेजेटी विश्वविद्यालय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन के विभिन्न क्षेत्रों में लक्ष्य-उन्मुख मॉड्यूलर शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
जेजेटी विश्वविद्यालय के नवनियुक्त प्रो-चेयरपर्सन डॉ. (ब्रिगेडियर) सुरजीतसिंह पाब्ला ने कहा कि, ‘‘जेजेटी विश्वविद्यालय में हम विद्यार्थियों को ऊंचे आदर्शों पर आधारित उच्च-गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना चाहते हैं। साथ ही हम ऐसे रिसर्च कार्य को प्राथमिकता देना चाहते हैं, जो विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाए। इस तरह गुणवत्ता-आधारित एक शिक्षण संस्थान की स्थापना करते हुए हम समाज में परिवर्तन लाने की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहते हैं। विभिन्न विषयों से संबंधित पाठ्यक्रम और विशेषज्ञता प्रदान करने वाले एक उभरते विश्वविद्यालय के रूप में हम राजस्थान में सबसे जीवंत ग्रामीण शिक्षा केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।‘‘
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