आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी द्वारा सेलीब्रेट किया गया अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस और 'चूज द चैलेंज थीम' का समर्थन किया गया

Friday, Apr 23, 2021 | Last Update : 02:06 AM IST

आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी द्वारा सेलीब्रेट किया गया अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस और 'चूज द चैलेंज थीम' का समर्थन किया गया

आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस आयोजित किया गया और इसकी थीम 'चूज द चैलेंज' का समर्थन किया गया।
Mar 9, 2021, 11:38 am ISTNationAazad Staff
आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
  आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस आयोजित किया गया और इसकी थीम 'चूज द चैलेंज' का समर्थन किया गया। इसके तहत प्रसिद्ध गायनेकोलॉजिस्ट को आमंत्रित कर यूनिवर्सिटी की महिला स्टाफ मेंबर्स के लिए 'सर्वाइकल कैंसर एंड मेन्स्ट्रल हाईजीन मैनेजमेंट' विषय पर सैशन आयोजित किया गया।

अकेले भारत में प्रतिवर्ष 74,000 महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर से मौत होती है। यह भारतीय महिलाओं में दूसरा सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला कैंसर है, दुनिया की सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित 73 प्रतिशत महिलाओं में 27 प्रतिशत का बड़ा हिस्सा भारतीय महिलाओं का है।

मेन्स्ट्रल हाईजीन मैनेजमेंट (एमएचएम) मासिक धर्म के रक्त को अवशोषित करने के लिए स्वच्छ सामग्री का उपयोग करने से संबंधित है, जिसे निजी व सुरक्षित तौर पर स्वच्छता के रूप में और अक्सर मासिक धर्म चक्र की अवधि के लिए आवश्यकतानुसार बदला जा सकता है।

परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग फॉर एक्शन 2020 (पीएमए-2020) के अनुसार राजस्थान में 15 से 49 वर्ष की आयु की 5,084 बालिकाओं व महिलाओं में से केवल 36 प्रतिशत के पास ही अपने मासिक धर्म का प्रबंधन करने की पूरी व्यवस्था है। अधिकांश महिलाएं अपने प्रजनन वर्षों के दौरान एमएचएम की ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं होती हैं। लगभग 44 प्रतिशत महिलाएं अपनी एमएचएम की वस्तुओं को धोती हैं और उनका पुनः उपयोग करती हैं।

इस चुनौती भरी दुनिया में चुनौती से ही बदलाव आता है, लेकिन सवाल यह है कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर क्या चुनौती है। हम भारत में 2030 तक लैंगिक समानता के 'सस्टेनेबल डवलपमेंट गोल-5' को प्राप्त करने से बहुत दूर हैं। विविधता के साथ समानता का जश्न मनाने के लिए आवश्यक बदलाव की सख्त आवश्यकता है। 2019 एसडीजी जेंडर इंडेक्स स्कोर और रैंकिंग के अनुसार, भारत ने पांच प्रमुख संकेतकों (बच्चे, जल्दी व जबरन शादी, जीवनसाथी द्वारा हिंसा, गर्भपात के लिए कानूनी आधार; संसद में महिलाएं; मंत्री की भूमिकाओं में महिलाएं) के आधार पर केवल 56.2 स्कोर हासिल किया है।

सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज की निदेशक, डॉ. नूतन प्रभा जैन, ने सुझाव दिया कि, 'हमें पहले अपने आपको चुनौती देने की जरूरत है। फिर अपनी रूढ़ियों को चुनौती दें, अपने व्यवहार को चुनौती दें, और ऐसा आचरण करें कि यदि आप देखते हैं कि यह आपकी अधिकतम क्षमता का उपयोग करने में बाधा है। प्रत्येक संस्थानों और यहां तक कि परिवार में भी भारत के संविधान की एक प्रति रखें और लैंगिक समानता के प्रावधानों को महत्व दें। आप एक अच्छे पड़ोसी बनें और कहीं भी लिंग आधारित हिंसा हो तो चुप्पी तोड़कर इसके खिलाफ आवाज उठाएं। साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं व प्रावधानों के बारे में जागरूकता उत्पन्न करें।

सेंटर फॉर जेंडर स्टडीज (सीजीएस) की शुरूआत वर्ष 1997 में तत्कालीन आईआईएचएमआर इंस्टीट्यूट में रिसोर्स सेंटर ऑन वुमन हैल्थ, एम्पावरमेंट एंड राइट्स में हुई थी। इसे इंस्टीट्यूट में वित्तीय सहायता के लिए पांच साल के लिए प्रोजेक्ट मोड में शुरू किया गया था। आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी की ओर से आज स्टूडेंट्स के लिए चूज टू चैलेंज थीम पर रंगोली मेकिंग प्रतियोगिता पोस्टर प्रजेंटेशन जैसी गतिविधियां आयोजित की गई। इनके अलावा स्किट, माइम व गायन जैसी कई रोचक गतिविधियां भी आयोजित की गई। यूनिवर्सिटी में चल रहे टेनिंग प्रोग्राम में भाग ले रहे प्रतिभागियों ने भी इन गतिविधियों का आनंद उठाया।

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