श्यामलाल गुप्त की आज है पुण्यतिथि

Wednesday, Sep 30, 2020 | Last Update : 07:24 AM IST

श्यामलाल गुप्त की आज है पुण्यतिथि

'विजयी विश्व तिरंगा प्यारा' के रचयिता थे श्यामलाल गुप्त
Aug 10, 2018, 12:59 pm ISTLeadersAazad Staff
Shyamlal Gupta
  Shyamlal Gupta

श्यामलाल गुप्त का जन्म कानपुर ज़िले के नरवल गाँव में एक वैश्य परिवार में हुआ। इन्होंने मिडिल की परीक्षा के बाद विशारद की उपाधि हासिल की। जिसके पश्चात् ज़िला परिषद तथा नगरपालिका में अध्यापक की नौकरी प्रारंभ की परन्तु दोनों जगहों पर तीन साल का बॉन्ड (अनुबंध) भरने की नौबत आने पर नौकरी से त्यागपत्र दे दिया।

1920 में वे फ़तेहपुर ज़िला काँग्रेस के अध्यक्ष बने। इस दौरान 'नमक आंदोलन' तथा 'भारत छोड़ो आंदोलन' का प्रमुख संचालन किया तथा ज़िला परिषद कानपुर में भी वे 13 वर्षों तक रहे। असहयोग आंदोलन में भाग लेने के कारण पार्षदजी को रानी यशोधर के महल से 21 अगस्त 1921 को गिरफ़्तार किया गया। ज़िला कलेक्टर द्वारा उन्हें दुर्दांत क्रांतिकारी घोषित करके केंद्रीय कारागार आगरा भेज दिया गया।

'विजयी विश्व तिरंगा प्यारा गीत की रचना  श्यामलाल गुप्त  ने वर्ष 1924 में लिखा जिसे 1925 में कानपुर में कांग्रेस के सम्मेलन में पहली बार झंडारोहण के समय इस गीत को सार्वजनिक रूप से सामूहिक रूप से गाया गया। हालांकि काँग्रेस ने उस समय तक झंडा तो 'तिरंगा झंडा' तय कर लिया था पर जन-मन को प्रेरित कर सकने वाला कोई झंडागीत नहीं था। तब श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद' ने 'झण्डा गायन' लिखा जो पूरे भारत में बेहद लोकप्रिय और चर्चित हुआ। यह गीत आज भी लोगों को प्रेरणा देता है।

सन 1930 में नमक आंदोलन के सिलसिले में पुन: गिरफ़्तार हुए और कानपुर जेल में रखे गए। पार्षदजी सतत स्वतंत्रता सेनानी रहे और 1932 में तथा 1942 में फरार रहे। 1944 में आप पुन: गिरफ़्तार हुए और जेल भेज दिए गए। इस तरह आठ बार में कुल छ: वर्षों तक राजनैतिक बंदी रहे। स्वाधीनता आंदोलन में भाग लेने के दौरान वे चोटी के राष्ट्रीय नेताओं- मोतीलाल नेहरू, महादेव देसाई, रामनरेश त्रिपाठी और अन्य नेताओं के संपर्क में आए।

भारत की स्वतंत्रता के बाद सन 1952 में लाल क़िले से उन्होंने अपना प्रसिद्ध 'झंडा गीत' गाया। 1972 में लाल क़िले में उनका अभिनंदन किया गया। 10 अगस्त 1977 को  श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद निधन हो गया।

...

Featured Videos!