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तुलसीदास की जीवनी और दोहे

तुलसीदास को वाल्मिकी का अवतार माना जाता है।
Feb 24, 2018, 1:20 pm ISTShould KnowAazad Staff
Tulsidas
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तुलसीदास जी हिन्दी और भारतीय तथा विश्व साहित्य के महान कवि माने जाते हैं। गोस्वामी तुलसीदास एक महान हिन्दू संत, समाजसुधारक के साथ ही दर्शनशास्त्र और कई प्रसिद्ध किताबों के भी रचयिता थे। तुलसीदास के द्वारा ही बनारस के प्रसिद्ध संकट मोचन मंदिर की स्थापना हुई थी।

तुलसीदास को हमेशा वाल्मिकी (संस्कृत में रामायण और हनुमान चालीसा के वास्वतिक रचयिता) के तौर पर प्रशंसा व सराहा गया।।

तुलसीदास का जन्म-
तुलसीदास का जन्म उत्तर प्रदेश के यमुना नदी के किनारे राजापुर (चित्रकुट) में माना जाता है। इनके जन्म के साल को लेकर कई तरह की अटकले लगाई जाती है। कुछ का मनना है कि इनका जन्म विक्रम संवत के अनुसार वर्ष 1554 में हुआ था लेकिन कुछ का मानना है कि तुलसीदास का जन्म वर्ष 1532 हुआ था।

ऐसा माना जाता है कि तुलसीदास 12 महीने तक माँ के गर्भ में थे। और उनके पास जन्म से ही 32 दाँत थे और वो किसी पाँच साल के बच्चे की तरह दिखाई दे रहे थे।ये भी माना जाता है कि उनके जन्म के बाद वो रोने के बजाय राम-राम बोल रहे थे। इसी वजह से उनक नाम रामबोला पड़ गया।

इनके जन्म के चौथे दिन इनके पिता की मृत्यु हो गयी थी। अपने माता पिता के निधन के बाद अपने एकाकीपन के दुख को तुलसीदास ने कवितावली और विनयपत्रिका में भी बताया है।

हिंदी साहित्य के एक महान कवि और रचनाकार हैं, तुलसीदासजी की सभी रचनाये प्रसिद्ध है व अनमोल है उनके दोहों में बहुत अच्छे संदेश रहते है जो प्रेरणादायक होते है।  

तुलसीदास जी के दोहे एवं उनके अर्थ -

दोहा :- “तुलसी मीठे बचन ते सुख उपजत चहुँ और, बसीकरण इक मंत्र हैं परिहरु बचन कठोर.”

अर्थ :- तुलसीदासजी कहते हैं की मीठे वचन सब और सुख फैलाते हैं. किसी को भी वश में करने का ये एक मंत्र होते हैं इसलिए मानव ने कठोर वचन छोड़कर मीठे बोलने का प्रयास करे.

दोहा :- “सचिव बैद गुरु तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस, राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास.”

अर्थ :- तुलसीदास जी कहते हैं की मंत्री वैद्य और गुरु, ये तीन यदि भय या लाभ की आशा से प्रिय बोलते हैं तो राज्य, शरीर एवं धर्म इन तीन का शीघ्र ही नाश हो जाता हैं.

दोहा :- “तुलसी मीठे बचन ते सुख उपजत चहुँ और, बसीकरण इक मंत्र हैं परिहरु बचन कठोर.”

अर्थ :- तुलसीदासजी कहते हैं की मीठे वचन सब और सुख फैलाते हैं. किसी को भी वश में करने का ये एक मंत्र होते हैं इसलिए मानव ने कठोर वचन छोड़कर मीठे बोलने का प्रयास करे.

दोहा :- “सचिव बैद गुरु तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस, राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास.”                                                                                                                     अर्थ :- तुलसीदास जी कहते हैं की मंत्री वैद्य और गुरु, ये तीन यदि भय या लाभ की आशा से प्रिय बोलते हैं तो राज्य, शरीर एवं धर्म इन तीन का शीघ्र ही नाश हो जाता हैं.

दोहा :- “सरनागत कहूँ जे तजहिं निज अनहित अनुमानि, ते नर पावॅर पापमय तिन्हहि बिलोकति हानि.”
अर्थ :- जो इन्सान अपने अहित का अनुमान करके शरण में आये हुए का त्याग कर देते हैं वे क्षुद्र और पापमय होते हैं. दरअसल, उनको देखना भी उचित नहीं होता.

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