Former Prime Minister Atal Bihari Vajpayee (पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी)

Wednesday, Sep 30, 2020 | Last Update : 09:26 AM IST

परिचय, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी बी जे पी के वरिष्ट नेता और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी | भारत के ग्यारवे प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म २५ दिसंबर १९२४ को ग्वालियर मध्य प्रदेश हुआ ।
Jan 8, 2013, 5:46 pm ISTLeadersSarita Pant
Former Indian Prime Minister Atal Bihari Vajpayee
  Former Indian Prime Minister Atal Bihari Vajpayee

भारत के ग्यारवे प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का  जन्म २५ दिसंबर १९२४ को ग्वालियर मध्य प्रदेश हुआ । उनकी माँ का नाम कृष्णा बाजपाई और पिता का नाम कृष्ण बिहारी बाजपाई था, उनके पिता ग्वालियर में अधयापन का कार्य करते थे और साथ ही वह हिंदी और बृज भाषा के कवि थे ।

अटल जी की बी०ए० की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज (वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज) में हुई। छात्र जीवन से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और तभी से राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे। कानपुर के डी०ए०वी० कालेज से राजनीति शास्त्र में एम०ए० की परीक्षा प्रथम में उत्तीर्ण की। उसके बाद उन्होंने अपने पिताजी के साथ-साथ कानपूर की पढ़ाई भी प्रारम्भ की लेकिन उसे बीच में ही विराम देकर पूरी निष्ठा से संघ के कार्य में जुट गये।

अटल जी १६ मई से  जून १९९६ तक और फिर १९ मार्च १९९८ से २२ मई २००४ तक भारत के प्रधानमंत्री रहे, अटल जी हिंदी कवि ,पत्रकार और वक्ता भी है वह भारतीये जनसंघ की इस्थापना करने वाले महापुरुषों में से एक है अटल जी १९६८ से १९७३ तक उसके अधयक्ष भी रहे भारतीये राजनीती में उनकी भूमिका सक्रिय है अटल जी की वीर अर्जुन ,राष्ट्रधर्म और पांचजन्य भावना से ओत - प्रोत अनेक पत्र - पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया । उन्होने अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ   के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ किया था और देश के सर्वोच्च पद पर पहुँचने तक उस संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया।

अटल जी ने राष्ट्रीय जनतंतरिक गठ्बंदन सरकार के पहले प्रधानमन्त्री थे जिन्होंने गैर काँग्रेसी प्रधानमन्त्री पद के 5 साल बिना किसी समस्या के पूरे किए। उन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मन्त्री थे। कभी किसी दल ने आनाकानी नहीं की। इससे उनकी नेतृत्व क्षमता का पता चलता है।अटल जी रजनीति से सन्यास ले चुके है और अब अटल जी कृष्णमेनन सरकारी आवास में रहते है । डॉ॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पण्डितदीनदयाल उपाधयाय के निर्देशन में राजनीति का पाठ तो पढ़ा ही, साथ-साथ पाञ्चजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश और वीर अर्जुन जैसे पत्र-पत्रिकाओं केसम्पादन का कार्य भी कुशलता पूर्वक करते रहे।

सर्वतोमुखी विकास के लिये किये गये योगदान तथा असाधारण कार्यों के लिये 2014 दिसंबर में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया । वह भारतीय जनसंघ  की स्थापना करने वालों में से एक हैं और सन् १९६८  से १९७३ तक वह उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। सन् १९५५ में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, परन्तु सफलता नहीं मिली। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सन् १९५७ में बलरामपुर (जिला गोलकोण्डा , उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुँचे। सन् १९५७ से १९७७ तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे बीस वर्ष तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे।

१९७७ से १९७९ में मोरारजी देसाई की सरकार में वे विदेशी मंत्री रहे और विदेशो में भारत की छवि बनायीं । १९८० में  जनता पार्टी से असन्तुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीये  जनता पार्टी  की स्थापना में मदद की। ६ अप्रैल १९८० में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का दायित्व भी वाजपेयी को सौंपा गया। दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुए। लोकतन्त्र के सजग प्रहरी अटल बिहारी वाजपेयी ने सन्१९९७ में प्रधानमन्त्री के रूप में देश की बागडोर संभाली। १९ अप्रैल१९९८  को पुनः प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली और उनके नेतृत्व में १३ दलों की गठबन्धन सरकार ने पाँच वर्षों में देश के अन्दर प्रगति के अनेक आयाम छुए।

सन् २००४ में कार्यकाल पूरा होने से पहले भयंकर गर्मी में सम्पन्न कराये गये लोकसभा चुनावों में भा०ज०पा० के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन (एन०डी०ए०) ने वाजपेयी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और भारत उदय (अंग्रेजी में इण्डिया शाइनिंग) का नारा दिया। इस चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। ऐसी स्थिति में वामपंथी दलों के समर्थन से काँग्रेस ने भारत की केन्द्रीय सरकार पर कायम होने में सफलता प्राप्त की और भा०ज०पा० विपक्ष में बैठने को मजबूर हुई। बी जे पी के वरिष्ट नेता और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का यू पी  की राजधानी लखनऊ से उनका ख़ास लगाव रहा है, यही से वह कवि और पत्रकार और पत्रकार से राजनेता बने |यहाँ से काई बार संसद पहुचे यही से सांसद रहेते हुए देश के प्रधानमन्त्री बने उन्होने लखनऊ के विकास के लिए कई बार योजनाए शुरू करवाई |

लेकिन ये सभी योजनाए करोड़ो खर्च किये जाने के बावजूद राजनीतिक इच्छाशक्ति और सरकार बजट के अभाव मे अधूरी पड़ी है |कई बार उनके करीबियों ने बायोग्राफी पर काम करने की सलाह दी लेकिन अटल जी ने हर बार  मुसकरा कर  टाल दिया वे कहते है कि मेरी प्राथमिकता कश्मीर पर कुछ लिखना ज़रूर है | एन.डी.ए जब सत्ता से बाहर हुआ तो वे मनाली मे थे वहा भी उन्होने अपनों के बीच कहा कि अब कश्मीर पर काम करने के लिए मेरे पास वक्त रहेगा |

काफी पहले श्यामाप्रसाद मुखर्जी पर उन्होने किताब भी लिखी थी - मृत्यु या हत्या,अटल जी 2004 के बाद गिने चुने सार्वजनिक आयाजनो मे देखे गए है , जबकि भाषण कला ही तो उनकी पहचान रही है पर वे अब 'मौन' है | पैरालिसिस ने उनकी वाणी को विराम भले ही दे दिया हो मगर वे चैतन्य है इशारो में संवाद करते है | 20 सालो में करीब दस सर्जरी हुई है उनकी मुंबई में पार्टी की राष्ट्रिय कार्यसमिति का आखरी आयोजन था जिसमे वे शारीक हुए | वे व्हील चेअर पर आये थे सिर्फ एक ही पन्ती का ही भाषण हुआ | वह पहला मौका था जब उन्होने इतना संषिप्त उदघोषण दिया, उन्होने कहा था यह परिवर्तन का काल है | आज वे 88 साल के हो गए है |

प्रधानमंत्री के रूप में अटल का कार्यकाल

  1. भारत को  परमाणु शक्ति में सम्पन रास्त्र बनाया । अटल सरकार ने ११ और १३ मई १९९८ को  पाँच भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट करके भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया। इस कदम से उन्होंने भारत को निर्विवाद रूप से विश्व मानचित्र पर एक सुदृढ वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया। यह सब इतनी गोपनीयता से किया गया कि अति विकसित जासूसी उपग्रहों व तकनीकी से संपन्न पश्चिमी देशों को इसकी भनक तक नहीं लगी। यही नहीं इसके बाद पश्चिमी देशों द्वारा भारत पर अनेक प्रतिबंध लगाए गए लेकिन वाजपेयी सरकार ने सबका दृढ़तापूर्वक सामना करते हुए आर्थिक विकास की ऊचाईयों को छुआ।
  2. अटल जी ने पाकिस्तान से सम्बन्धो में सुधार की पहल की और १९ फ़रवरी १९९९ को सदा-ए -सरहद नाम से दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा भी शुरू की गयी|
  3. भारत भर के चारों कोनों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए (अंगरेजी में- गोल्डन क्वाड्रिलेट्रल प्रोजैक्ट या संक्षेप में जी क्यू प्रोजैक्ट) की शुरुआत की गई। इसके अंतर्गत दिल्ली ,कोलकाता ,चेन्नई और मुंबई  को राजमार्ग से जोड़ा गया। एसा माना जाता है कि अटल जी के शासनकाल में भारत में जितनी सड़कों का निर्माण हुआ इतना केवल शेर शाह सूरी  के समय में ही हुआ था।
  4. एक सौ साल से भी ज्यादा पुराने कावेरी जल विवाद को सुलझाया।
  5. संरचनात्मक ढाँचे के लिये कार्यदल, सॉफ्टवेयर विकास के लिये सूचना एवं प्रौद्योगिकी कार्यदल, विद्युतीकरण में गति लाने के लिये केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग आदि का गठन किया।
  6. राष्ट्रीय राजमार्गों एवं हवाई अड्डों का विकास; नई टेलीकॉम नीति तथा कोकण रेलवे की शुरुआत करके बुनियादी संरचनात्मक ढाँचे को मजबूत करने वाले कदम उठाये।
  7. राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, आर्थिक सलाह समिति, व्यापार एवं उद्योग समिति भी गठित कीं।
  8. आवश्यक उपभोक्ता सामग्रियों की कीमतें नियन्त्रित करने के लिये मुख्यमन्त्रियों का सम्मेलन बुलाया।
  9. उड़ीसा के सर्वाधिक गरीब क्षेत्र के लिये सात सूत्रीय गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम शुरू किया।
  10. आवास निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए अर्बन सीलिंग एक्ट समाप्त किया।
  11. ग्रामीण रोजगार सृजन एवं विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के लिये बीमा योजना शुरू की।
  12. सरकारी खर्चे पर रोजा इफ़्तार शुरू किया ये सारे तथ्य सरकारी विज्ञप्तियों के माध्यम से समय समय पर प्रकाशित होते रहे हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक कवि भी हैं। अटल जी को काव्य रचनाशीलता एवं रसास्वाद के गुण विरासत में मिले हैं। उएवं काव्यमय होने के कारण उनकी रगों में काव्य रक्त-रस अनवरत घूमता रहा है। उनकी सर्व प्रथम कविता ताजमहल थी।  उनके संघर्षमय जीवन, परिवर्तनशील परिस्थितियाँ, राष्ट्रव्यापी आन्दोलन, जेल-जीवन आदि अनेक आयामों के प्रभाव एवं अनुभूति ने काव्य में सदैव ही अभिव्यक्ति पायी।

अटल जी की प्रमुख रचनायें उनकी कुछ प्रमुख प्रकाशित रचनाएँ इस प्रकार हैं :

  • मृत्यु या हत्या
  • अमर बलिदान (लोक सभा में अटल जी के वक्तव्यों का संग्रह)
  • कैदी कविराय की कुण्डलियाँ
  • संसद में तीन दशक
  • अमर आग है
  • कुछ लेख: कुछ भाषण
  • सेक्युलर वाद
  • राजनीति की रपटीली राहें
  • बिन्दु बिन्दु विचार, इत्यादि।

अटल जी को पुरस्कार

  • १९९२: पदम विभूषण |
  • १९९३: डी लिट कानपुर विश्वविद्यालय |
  • १९९४: लोकमान्य तिलक पुरस्कार|
  • १९९४: श्रेष्ठ सासंद पुरस्कार |
  • १९९४: भारत रत्नपंडित गोविन्द वलभ पंत  पुरस्कार|
  • २०१४ दिसम्बर : भारत रत्न नित ।
  • २०१५ : डी लिट |
  • २०१५ : 'फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश लिबरेशन वार अवॉर्ड' |

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