धनतेरस से जुड़ी पौराणिक कथा

Monday, May 10, 2021 | Last Update : 01:57 AM IST

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धनतेरस से जुड़ी पौराणिक कथा

धनतेरस, दिवाली के पांच दिवसीय त्योहार का पहला दिन माना जाता है।इसी दिन भगवान धनवन्‍तरी प्रकट हुए थे।भगवान धन्वंतरि समुन्‍द्र मंथन के दौरान अपने साथ अमृत का कलश और औषधियां लेकर प्रकट हुए थे।
Nov 5, 2018, 1:44 pm ISTFestivalsAazad Staff
Dhanteras 2018
  Dhanteras 2018

पुराणों के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान सोने का कलश लेकर भगवान धन्वंतरि सोने का कलश लेकर उत्पन्न हुए थे। इस कलश में अमृत था जिसे पीकर भगवान अमर हो गए। इस समुद्र मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी उत्पन हुई जिस कराण देश भर में दो दिन दिवाली मनाई जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक राजा बलि के भय से देवताओं को मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था, जिसके बाद वह यग स्थल पर जा पहुंचे थे। लेकिन असुरों के गुरु शुक्राचार्य पहचान गए थे कि वामन के रूप में भगवान विष्णु ही हैं। इसलिए उन्होंने राजा बलि से कहा कि वामन जो भी मांगे वो उन्हें ना दिया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि वामन के रूप में भगवान विष्णु हैं, जो देवताओं की सहायता करने के लिए यहां आए हैं।

शुक्राचार्य ऐसा नहीं चाहते थे इसलिए राजा बलि को दान करने से रोकने के लिए शुक्राचार्य ने उनके कमंडल में लघु रूप धारण करके प्रवेश कर लिया। गुरु शुक्राचार्य की ये चालाकी भगवान विष्णु समझ गए। जिसके बाद उन्होंने अपने हाथों में मौजूद कुशा को कमंडल में इस तरह रखा कि शुक्राचार्य की एक आंख फूट गई। कहा जाता है कि इसके बाद भगवान द्वारा मांगी गई तीन पग भूमि को बलि ने दान करने का फैसला ले लिया। उस समय भगवान वामन ने अपने एक पैर से पूरी धरती को नापा और दूसरे पैर से अंतरिक्ष को नाप लिया लेकिन तीसरा पैर रखने के लिए कुछ स्थान नहीं बचा था, जिसके बाद बलि ने वामन भगवान के चरणों में अपना सिर रख दिया। इस तरह से देवताओं को बलि के भय से मुक्ति मिल गई थी। इसी जीत की खुशी में धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है।

सोना, चांदी और बर्तन खरीदना क्यों होता है शूभ :
धनदेरस के दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। ये कलश सोने का था। इसीलिए इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा शुरू हो गई। सिर्फ बर्तन ही नहीं बल्कि इस दिन सोने, चांदी और अन्य कीमती चीजों की खरीददारी होती है। इसी कारण से इस त्यौहार को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है।

धनदेरस के दिन घर के बाहर शाम को मुख्य द्वार पर और आंगन में दीपक जलाने की परंपरा है। इस दिन घर के बाहर दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। हिंदू  शास्त्रों के अनुसार मृत्यु के देवता यम की दिशा दक्षिण है इसलिए धनतेरस पर शाम को यम के लिए दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके एक दीपक जलाना चाहिए इससे अकाल मृत्यु का दोष टल जाता है।

धनतेरस का महत्व:
1. इस दिन नए उपहार, सिक्का, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। शुभ मुहूर्त में पूजन करने के साथ सात धान्यों की पूजा की जाती है. सात धान्य में गेहूं, उडद, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर शामिल होता है।
2. धनतेरस के दिन चांदी खरीदना शुभ माना जाता है।
3. भगवान धन्वन्तरी की पूजा से स्वास्थ्य और सेहत मिलता है। इस दिन ही दीपावली की रात लक्ष्मी गणेश की पूजा हेतु मूर्ति भी खरीदते हैं।

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