Tuesday, Jun 16, 2026 | Last Update : 02:38 AM IST
जया-पार्वती व्रत आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी से आरंभ होकर 5 दिनों तक चलता है। इस बार जया पार्वती व्रत 24 जुलाई 2018 (मंगलवार) से शुरू हो रहा है, जो 31 जुलाई 2018 (मंगलवार) तक चलेगा।
शास्त्रों के अनुसार जया पार्वती व्रत सौभाग्य की कामना के लिए विवाहित महिलाओं द्वारा किया जाता है। इसके अलावा इस दिन अविवाहित महिलाएं भी व्रत करती है और अच्छे जीवन साथी की कामना हेतु माता पार्वती की पूजा करती हैं।
-मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का रहस्य भगवान विष्णु जी ने मां लक्ष्मी जी को बताया था। बता दें कि ये व्रत करने से स्त्रियों को अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान प्राप्त होता है। ये व्रत कहीं एक दिन के लिे होता है तो कहीं 5 दिन तक मनाया जाता है। बालू रेत का हाथी बना कर उन पर 5 प्रकार के फल, फूल और प्रसाद चढ़ाए जाते हैं।
इस व्रत की पूजन विधि
• आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी के दिन सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें।
• तत्पश्चात व्रत का संकल्प करके माता पार्वती का ध्यान करें।
• पूजा के स्थान पर शिव-पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
• फिर भगवान शिव-पार्वती को कुंमकुंम, शतपत्र, कस्तूरी, अष्टगंध और फूल चढ़ाकर पूजा करें।
• ऋतु फल तथा नारियल, अनार व अन्य सामग्री अर्पित करें।
• अब विधि-विधान से षोडशोपचार पूजन करें।
• माता पार्वती का स्मरण करके स्तुति करें।
• फिर मां पार्वती का ध्यान धरकर सुख-सौभाग्य और गृहशांति के लिए सच्चे मन से प्रार्थना करें।
• कथा सुनें और आरती करके पूजन को संपन्न करें।
• कथा और आरती के बाद ब्राह्मण को भोजन करवाएं और इच्छानुसार दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें।
• अगर बालू रेत का हाथी बनाया है तो रात्रि जागरण के पश्चात उसे नदी या जलाशय में विसर्जित करें।
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