अंगारकी चतुर्थी 2018: अंगारकी चतुर्थी पूजा विधि और महत्व

Monday, May 10, 2021 | Last Update : 01:32 AM IST

follow us on google news

अंगारकी चतुर्थी 2018: अंगारकी चतुर्थी पूजा विधि और महत्व

हिंदू पंचांग के मुताबिक, हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान श्री गणेश को प्रसन्न करने के लिए विनायकी चतुर्थी का व्रत किया जाता है। इस माह में यह व्रत मंगलावर के दिन पड़ रहा है जिस कारण से इसे अंगारक गणेश चतुर्थी कहा जाता है।
Dec 11, 2018, 10:27 am ISTFestivalsAazad Staff
Lord Ganpati
  Lord Ganpati

हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने की शुक्ल पक्ष चतुर्थी के दिन विनायकी चतुर्थी का व्रत किया जाता है। इस माह ये व्रत शुक्ल पक्ष चतुर्थी का व्रत 11 दिसंबर यानी मंगलवार के दिन है। अंगारक गणेश चतुर्थी के दिन विधि विधान से गणेश पूजा करने से भगवान गणेश की कृपा मिलती है।

पूजा का महत्व
भगवान गणेश का एक भक्त था अंगारकी। अंगारकी ऋषि भारद्वाज और मां पृथ्वी का बेटा था। उन्होंने भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर भगवान गणेश अंगारकी के समक्ष आए और उनसे उनकी इच्छा के बारे में पूछा। अंगारकी ने कहा कि हे प्रभु मैं आपके नाम के साथ जुड़ना चाहता हूं। मेरा नाम भी आपके नाम के साथ जुड़ जाए। इस दौरान गणपति ने उन्हें वरदान दिया कि जब भी मंगलवार को चतुर्थी पड़ेगी, उस चतुर्थी को अंगारकी चतुर्थी कहा जाएगा। अंगारकी को भगवान मंगल भी कहा जाता है। आज के दिन व्रत करने व विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान गणेश की कृपा बनी रहती है। दुख व दरिद्रता दूर होती है।

पूजा विधि
अंगारक गणेश चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर व्रत करने का संकल्प लें। इसके बाद अपनी इच्छा व सामर्थ के अनुसार सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी गणेश जी की मूर्ति को मंदिर में स्थापित करें। मूर्ति स्थापित कर गणेश जी का षोड़शोपचार विधि से पूजा करें। गणेश जी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं और गणेश मंत्र का जाप करें।

भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए गणेश को सबसे प्रिय माने जाने वाला दुर्वा चढाएं।  दुर्वा चढाने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं। भगवान गणेश तो दुर्वा चढाते हुए गणेश मंत्र ऊँ गं गणपतैय नम: का जाप करें व 21 दूर्वा गजानन को अर्पित करें। ऐसा करने से विघ्नहर्ता की कृपा हमेशा जीवन मे बनी रहती है।

गणेश जी को  5 मोदक का भोग लगाएं। इसके बाद ब्राह्मण को सामर्थ के अनुसार दान दें व ब्राह्मऩ को भोजन कराएं। यदि संभव हो तो उपवास करें क्योंकि इस व्रत को आस्था और श्रद्धा से पालन करने पर भगवान श्री गणेश की कृपा से आपकी हर मनोकामना पूरी होगी और आप हमेशा सफलता को प्राप्त करेंगे|

...

Featured Videos!