Lal Krishna Advani (लाल कृष्ण अडवाणी )

Sarita Pant

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लाल कृष्ण अडवाणी का जन्म ८ नवंबर १९२७ कराची (पाकिस्तान) के हिन्दू सिंधी परिवार में हुआ | Lal Krishna Advani is a senior BJP leader who served as the Minister of Home Affairs in the BJP-led National Democratic Alliance government from 1998 to 2004.

लाल कृष्ण अडवाणी के पिता किशनचंद डी अडवाणी और माता का नाम ज्ञानी देवी था , उनकी प्राम्भिक शिक्षा सेंट पैट्रिक हाई स्कूल करांची में हुई , उनका परिवार भारत में विभाजन के समय बॉम्बे में शिफ्ट हुआ उन्होने कानूनी शिक्षा बॉम्बे विश्वविद्यालय से पूरी की |

लाल कृष्णा अडवाणी की शादी कमला अडवाणी से १९३२ में हुई और ६ अप्रैल २०१६ में उनकी मृत्यु हो गयी, उनका एक बेटा जयंत और बेटी प्रतिभा है अभी हाल ही में प्रतिभा ने एक टीवी सीरियल उतपादित किया | प्रतिभा अपने पिता को राजनीती गतिविधियों में भी मदद करती है

अडवाणी एक भारतीये नेता और जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता है | अडवाणी जी २००२ -२००४ तक प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी बाजपाई के साथ उप प्रंधानमंत्री का काम किया वह विरोधी पार्टी की तरफ से १० लोकसभा और १४ लोकसभा नेता रह चुके है, अडवाणी ने अपना राजनैतिक व्यवसाय स्वयंसेवक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शुरू किया | २०१५ में अडवाणी जी को पदम् विभूषण से भी सम्मान्नित किया गया |

अडवाणी जी सन १९४२ को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में शामिल हुए, वह वहा करांची ब्रांच के प्रचारक भी थे |

भारत पाकिस्तान विभाजन के बाद वह राजस्थान में मत्स्य अलवर में प्रचारक भेजे गये उन्होंने अलवर , भरतपुर, कोटा ,बूंदी और झालावार जिला में १९५२ तक काम किया ,उसके बाद १९५१ में श्यामा प्रसाद मुकर्जी के नेतृव्य में जना संघ की इस्थापना हुई जिसके अडवाणी जी सदस्य बने वो स स भंडारी के के सचिव बने |

१९५७ से अडवाणी संसदीय मामलो को देखने दिल्ली के लिये रवाना हो गये उसके बाद वो दिल्ली के महासचिव तथा बाद में दिल्ली के जना संघ के अध्यक्ष बने |

सन १९७० में अडवाणी जी दिल्ली से राज्य सभा के सदस्य बने | सन १९७६-१९८२ तक वह गुजरात में राज्य सभा के सदस्य बने | इंदिरा गांधी आपातकाल के समय जान संघ की बहुत सी पार्टीज जनता पार्टी में सम्लित हो गयी तब अडवाणी जी और अटल बिहारी के साथ १९७७ में लोकसभा का चुनाव लड़ा तब वह जनता पार्टी के सदस्य थे |

अडवाणी जी अभी तक ६ रथ यात्रा भारत में कर चुके है |

१. राम रथ यात्रा उनकी पहली रथ यात्रा सन २५ सितम्बर १९९० में सोमनाथ गुजरात से शुरू हुई जो ३० अक्टूबर १९९० को अयोध्या जाकर पहुंची |
२. जनादेश यात्रा जो सं ११ सितम्बर १९९९३ मैसोर से शुरू हुई |
३. स्वर्ण जयंती यात्रा जो मई और जुलाई १९९७ में हुई |
४. भारत उदय यात्रा जो सं २००४ में लोक सभा चुनाव के समय में शुरू हुई |
५. भारत सुरक्षा यात्रा सं ६ अप्रैल से १० अप्रैल २००६ |
६. जन चेतना यात्रा |

खुशवंत सिंह के विचार से अडवाणी जी ठंडे दिमाग,ईमानदार और साफ़ राजनीती करने वाले व्यक्ति है |

अब्दुलकलाम ने अडवाणी जी आत्मकथात्मक पर एक किताब My Country My Life भी लिखी जो १९ मार्च २००८ को प्रकाशित हुई इस किताब में १०४० पन्ने है|

लाल कृष्णा अडवाणी जी द्वारा ली प्रतिज्ञा भारत को आगे ले जाने में :-

मै उन लोगो की आवाज बनूगा जिनकी खुद की आवाज नहीं है ( I will first listen to the voices of those who do not have a voice).

मैं हर युवा व्यक्ति को अपना सपने ढूंढ़ने में मदद करुँगा ( I will try to help every young person find their dream).

मैं ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं छोड़ूगा जो भय में जी रहा हो (I will not let a single person live in fear).

मैं किसी को भी महिलाओं का अपमान नहीं करने दुगा और उनको इज़्ज़त दिलवाने का प्रयास करुँगा (I will allow no one to treat a women with disrespect)

मैं हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार देने के लिये अथक प्रयास करुगा (I resolve to work tirelessly to send every child to school).

मैं भारत को आगे जाने के सभी प्रयास और वचनबन्ध हू (I Pledge, in every way, to put India first).

अडवाणी @ कैंपस (Advani@Campus)अभियान भी है जो भारत के विद्यारर्थी की आवाज बनेगा भारत को आगे ले जाने में |

इस अभियान का सपना है भारत में रोज़गार में भारी वृद्धि के साथ अर्थव्यवस्था को बदलने के लिए महत्वाकांक्षी पहल करना ( Ambitious initiatives to transform the economy with massive increase in employment)

मानव विकास सूचकांक में भारत की वैश्विक रैंकिंग में वृद्धि करने के लिए संकल्प 128 से दस में से दस (Resolve to raise India?s global ranking in Human Development Index from 128 to TOP TEN)

दूरगामी सुशासन सुधार लाना (Far-reaching Good Governance reforms)

सभी के लिए न्याय व्यवस्था कोई किसी का अपमान न कर सके (Justice for All, Appeasement of None)

आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए शून्य-सहनशीलता दृष्टिकोण अपनाना (Zero-Tolerance approach to combat terrorism)

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