विश्व पर्यावरण दिवस 2018, प्लास्टिक पर्यावरण के लिए खतरा

Aazad Staff

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इस साल विश्व पर्यावरण दिवस की थीम ‘बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन’ रखी गई है।

विश्व स्तर पर पांच जून ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है।इस दिन को मनाने का लक्ष्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण और उसकी सुरक्षा के प्रति जागरुक करना है। इस दिन को 1972 में संयुक्त राष्ट्र ने सबसे पहले मनाया था। जिसके बाद से 5 जून 1974 को इस दिन को विश्व पर्यावरण दिवस के तौर पर मनाया जाने लगा। आज के दिन हम अपनी प्रकृति को बचाने के लिए सबसे ज्यादा वृक्ष लगाने का कार्य करते है।

बढ़ती आबादी और नई तकनीकियों के कारण प्रकृति पर प्रदूषण का संकट कई सालों से मंडरा रहा है। जो दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है आज हमारे आस पास के वातावरण इतने प्रदूषित हो चुके है जो कई प्रकार की बीमारियों को उत्तपन कर रहे है। लोग अपनी सुविधा के अनुसार पेड़-पौधो को नष्ट करते जा रहे। आज देश-दुनिया में प्रदूषण का सबसे अहम व मुख्य कारण प्लाटिक है जिसे ना ही हम जला सकते है और ना ही जल्द खत्म/ नष्ट कर सकते है। ये बात जान कर आपको ताजुब होगा की एक वर्ष में हर व्यक्ति 9.7 किग्रा प्लास्टिक इस्तेमाल करता है।

आपको बता दें कि स्वच्छ आबोहवा के लिए दुनियाभर में अलग पहचान रखने वाली देवभूमि के 81 नगर निकाय क्षेत्रों से प्रतिदिन औसतन 1600 टन कचरा निकल रहा है। जिसमें सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें 17 प्रतिशत प्लास्टिक कचरा शामिल है, जो प्रतिदिन औसतन 275 टन है।

प्लास्टिक वातावरण को दूषित करने के साथ साथ कई प्रकार की बीमारियों को भी उत्पन्न करता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से देश के 60 बड़े शहरों में हुए सर्वे में यह बात सामने आई है कि पूरे देश में प्रतिदिन 25940 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, देश में हर साल प्रति व्यक्ति 9.7 किग्रा प्लास्टिक का इस्तेमाल करता है, जो बाद में कचरे के रूप में तब्दील होता है।

एक सर्वे के मुताबिक ये बात सामने आई है कि पर्यटको द्वारा सबसे अधिक मात्रा में प्लास्टिक कचरा प्रदूषण फैला रहा है। पर्यटक अपने साथ प्लास्टिक के सामान लाते है जैसे कि चिप्स, बिस्कुट, पानी बोतल आदि के पैकेट, इन्हे इस्तमान कर वे रास्ते, नदी-नालों, पहाड़ों, सड़को पर फेक कर चले जाते है। जो आगे  चलकर एक घातक रुप ले लेता है।

प्रदूषण की गिनती में भारत का स्थान -

जिनेवा ने दुनिया के 15 उन शहरों की सूची जारी की है जो सबसे ज्यादा प्रदूषित हैं। इस सूची के अनुसार टॉप 10 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर भारत के ही हैं। पहले नंबर पर उत्तर प्रदेश के शहर कानपुर का नाम है। जहां 173 पीएम 2.5 प्रदूषण है। वहीं प्लास्टिक कचरे के मामले में दिल्ली पहले स्थान पर है। दिल्ली से रोजाना 689.52 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है।

लगातार बढ़ता प्रदूषण देश-दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने की अत्यंत जरुरत है अन्यथा हमारी ये हरी-भरी प्रकृति  इस कदर विरान हो जाएगी जो किसी के रहने लायक ही नहीं रहेंगी।

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