चैत्र पूर्णिमा शुभ मुहूर्त और विधि

Aazad Staff

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चैत्र पूर्णिमा को हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व दिया जाता है। हिंदूओं में तो यह दिन विशेष रूप से पावन माना जाता है। इस दिन से ही हिंदूओं में वर्ष का प्रथम चंद्र मास भी शुरु होता है। इस दिन लोग उपवास कर चंद्रमा की पूजा करते है। इस दिन को इस लिए भी भाग्यशाली माना जाता है क्योंकि समस्त उत्तर भारत में इस दिन राम भक्त हनुमान जी की जयंती भी मनाई जाती है।

हिन्दी पंचांग के अनुसार इस बार चैत्र मास में दो दिन पूर्णिमा तिथि रहेगी। १८ अप्रैल को व्रत की पूर्णिमा है और १९ को स्नान दान करने की पूर्णिमा है। १८ अप्रैल को हाटकेश्वर जयंती मनाई जाएगी तो वही १९ अप्रैल यानी की शुक्रवार को हनुमान जंयती। जिस दिन पूर्णिमा होती है उस दिन चंद्रमा पूर्ण दिखाई देता है। इस लिए इसे चंद्र मास के नाम से भी जाना जाता है। पुर्णिमा के दिन दान पुण्य करना शुभ माना गया है। इतना ही नहीं पुराणों में चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर तुलसी-स्नान करना फलदाय होता है।

चैत्र पूर्णिमा व्रत विधि

ऐसी मान्यता है कि व्रत व त्यौहार की पूजा विधिनुसार न हो तो उसका फल प्राप्त नहीं होता। इस लिए व्रत व पूजा की विधि के बारे में जानना बेहद आवश्यक है। चैत्र पूर्णिमा बहुत ही शुभ फल देने वाली मानी जाती है। चैत्र पूर्णिमा का व्रत व्रती को निम्न विधि से रखना चाहिये-

सबसे पहले पूर्णिमा के दिन स्नान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिये। इस दिन रात्रि के समय चंद्रमा की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिये एवं पूजा के पश्चात चंद्रमा को जल अर्पित करना चाहिये। चंद्रमा के पूजा के पश्चात अन्न से भरे घड़े को किसी योग्य ब्राह्मण या फिर किसी गरीब जरुरतमंद को दान करना चाहिये। मान्यता है कि ऐसा करने से चंद्र देव प्रसन्न होते हैं और व्रती को मनोवांछित फल मिलता है। व्रती की मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

चैत्र पूर्णिमा २०१९ तिथि व मुहूर्त चैत्र पूर्णिमा का उपवास १९ अप्रैल को है। पूर्णिमा तिथि आरंभ – १९.२६  बजे (१८ अप्रैल २०१९) पूर्णिमा तिथि समाप्त – १६.४१ बजे (१९ अप्रैल २०१९)

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