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| Samarth Guru Shri Ramdas (समर्थ गुरु श्री राम दास) |
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Hindiसमर्थ गुरु श्री राम दास
देश भर मे प्राय ६०० से भी अधिक मंदिरों का निर्माण करवाया | माघ की नवमी को वह ब्रह्मलीन हो गये | उन्होने कई ग्रंथो की रचना करी जिनके नाम है ---चोदह शतक ,जन्स्वभावा,पञ्च समाधी ,पुकाश मानस पूजा ,जुना राय बोध्ह राम गीत परन्तु इनके ग्रन्थ मन ६ शलोक मे मन को वश मे रखने के लिये अनेक शिक्षा प्रद उदहारण दिये गये है जैसे- अरे मनन पूरे जीवन तुम इस शरीर की ही सेवा करते रहे हो और जब शरीर छूट गया तो तुम्हारा कही नामो निशान नहीं था | समर्थ गुरु रामदास जी ने बाल्मीकि की पूरी रामायण अपने हाथ से लिखी | यह पाण्डुलिपि आज भी धुबलिया के श्री एस एस देव के संग्रलाई मे सुरक्षित है | रामदास जी के हजारो शिष्यों छत्रपति शिवाजी और अम्बा जी उनकी हर प्रकार से सेवा करते और उनके वचनों को कलमबद्ध करते -
एक सच्ची घटना ->
एक घनी व्यक्ति श्री अग्निहोत्री की मृत्यु हो गयी अग्निहोत्री जी की पत्नी ने सती होने का प्राण लिया था | अत वह समस्त अभुश्नो से सुसजित अपने पति की चिंता पर अपने को बलिदान करने जा रही थी | तभी एक संत उधर से गुजरे और बिना शव को देखी उस महिला के प्रदुम करने पर उसको आशीर्वाद दी डाला "अस्तापुत्र सोभागय्वती भव " उसने रोते-रोते संत को उधर शव की और देखने का संकेत पर संत ने पास की बह रही गोदावरी नदी से चुलू भर पानी लिया और ईश्वर से प्राथना करते हुई वह जल शव पर झिड़क दिया मुर्दे मे जान आ गयी और अग्निहोत्री जी उठ गये | यह संत और कोई नहीं, शिवाजी के गुरु समर्थ स्वामी रामदास जी थे |
छत्रपति शिवाजी और रामदास स्वामी पहली बार १६७४ मे मिले शिवाजी ने रामदास स्वामी को अपना धार्मिक गुरु माना है|
समर्थ गुरु रामदास जी ने अपना समस्त जीवन रास्ट्र को अर्पित कर दिया |
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Samarath Guru Shri Ramdas (समर्थ गुरु श्री राम दास)


