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| Prem Chandra kai fate Jutai (प्रेम चन्द्र के फटे जूते) |
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Hindiप्रेम चन्द्र के फटे जूते लेखक आश्चर्य से पूछता है कि प्रेमचंद्र जी फटे जूतें पहन कर फोटो खिचा रहे है और किसी पर हस भी रहे है | यदि उन्हें फोटो खीचना ही था तो जूतें तो अच्छे पहन लेते शायद पत्नी के कहने पर फोटो खिचवा रहे होंगे | लेखक उनकी फोटो के माध्यम से उनके दुःख को महसूस करके रोना चाहता है लेकिन उनकी आखों का दर्द उन्हें ऐसा करने से रोक देता है | यदि वे फोटो का महत्त्व समझते तो जूतें मांग लेते | लैखेक यहाँ कहना चाहता है कि उन्होने समाज मई फैली बुरइयो को अपनी ठोकर साईं हटाने का प्रयास किया होगा रास्ते कि अडचनों को उन्होने जूते कि ठोकर से हटाना चाह होगा | लैखेक ये समझ गया कि प्रेमचंद्र जी समाज मई व्यापत भेदभाव और को देखकर मुस्करा रहे है वे अवसरवादी और स्वार्थपरक लोगो पैर व्यंग केर रहे है | जो वास्तविकता को छिपाते है संघर्षों से बचकर निकलती है उन पर हस रहे है | लेखक यही कहता है कि वे उनके दवारा दिये गयी निर्देशो को भली भाती समझ गयी है | English |
Prem Chandra kai fate Jutai (प्रेम चन्द्र के फटे जूते)


