महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma)

 Aug 20, 2010, 11:09 am IST
Author : Aazad Staff
महादेवी वर्मा, MAHADEVI VERMA, इन्हे आधुनिक युग की मीरा पुकारा जाता है | महादेवी जी ने हिंदी गध को भी कविता जैसे मधुरता प्रधान की |उनके पात्र समाज के दलित शोबित लोग, पशु-पक्षी आदि है| महादेवी आधुनिक युग की प्रसिद्ध कवयत्री एवं गधह लेखिका मानी जाती है |

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले मे प्रसिद्ध लेखिका महादेवी वर्मा का जनम २६ मार्च सन १९०७ मे हुआ था | इन्हे आधुनिक युग की मीरा पुकारा जाता है | महादेवी जी ने हिंदी गध को भी कविता जैसे मधुरता प्रधान की |उनके पात्र समाज के दलित शोबित लोग, पशु-पक्षी आदि है| महादेवी आधुनिक युग की प्रसिद्ध कवयत्री एवं गधह लेखिका मानी जाती है | इन्होने बी-ए जबलपुर से की वो अपने घर मे सबसे बड़ी थी उनके दो भाई और एक बेहन थी | इनकी शादी १९१४ मे डॉ स्वरुप नरेन वर्मा के साथ इंदौर मे ९ साल की उम्र मे हुई, वो अपने माँ पिताजी के साथ रहती थी क्योकि उनके पति लखनऊ मे पढ़ रहे थे| इनकी सारी शिक्षा अल्लाहबाद से की 'यामा और दीपशिखा' पर उन्हे भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला है | भारत सरकार ने १९५६ मे 'पदमभूषण' से समान्नित किया | आपकी रचनायो मे संस्कृत निष्ठ शब्दों की प्रचुरता है|

महादेवी वर्मा की मृत्यु ११ सितम्बर 1987, अशोक नगर अल्लाहबाद मे हुआ|

संस्मरण
अतीत के चलचित्र , समृति की रेखायाई पाठ के साथी, मेरा परिवार, यहाँ महादेवी वर्मा के 'मेरे बचपन के दिन ' लेख के कुछ दृश्य साकार किये जा रहे है |बचपन की यादो मे एक विचित्र सा आकर्षण होता है| महा देवी वर्मा अपने परिवार मे कई पीडियो के बाद उत्पन हुई |

उनके परिवार मे दौसो सालो से कोई लड़की पैदा नही हुई थी यदि होती तो उसी मार दी जाती थी | दुर्गा पूजा के कारण आपका जन्म हुआ | आपके दादा फारसी और उर्दू तथा पिताजी अंग्रेजी जानते थे| माता जी जबलपुर से हिंदी सीख कर आई थी, आपने पंचतंत्र और संस्कृत का अध्यन किया |

महादेवी वर्मा जी को काव्य प्रतियोगिता मे चांदी का कटोरा मिला था | जिसे इन्होने गाँधी जी को दे दिया था | महादेवी वर्मा कवि सम्मेलन मे भी जाने लगी थी, वो सत्याग्रह आंदोलन के दोरान कवि सम्मेलन मे अपनी कवितायेँ सुनाती और आपको हमेशा प्रथम पुरस्कार मिला करता था | महादेवी वर्मा मराठी मिश्रित हिंदी बोलती थी | महादेवी वर्मा के 'मेरे बचपन के दिन लेख के कुछ दृश्य साकार किये जा रहे है |

काव्य संग्रह
नीहार (१९३३), रश्मि (१९३२), नीरजा( १९३३), सहह्गीत (१९३५), दीपशिखा (१९४२), यामा

पुनर्मुद्रित संकलन:
यामा (1940), दीपगीत (1983),नीलाम्बरा (1983),आत्मिका (1983)

कुछ प्रतिनिधि कविताएँ
अधिकार, अलि! मैं कण-कण को जान चली , अलि अब सपने की बात , अश्रु यह पानी नहीं है उत्तर, कहां रहेगी चिड़िया , किसी का दीप निष्ठुर हूँ ,कौन तुम मेरे हृदय में, क्या जलने की रीत, क्या पूजन क्यों इन तारों को उलझाते?, जब यह दीप  थके ,जाग-जाग सुकेशिनी री! ,जाग तुझको दूर जाना, जाने किस जीवन की सुधि ले, जीवन दीप, जीवन विरह का      जलजात, जो तुम आ जाते एक बार, जो मुखरित कर जाती थीं, तुम मुझमें प्रिय, तेरी सुधि बिन, दिया क्यों जीवन का     वरदान, दीपक अब रजनी जाती रे, दीपक चितेरा, दीपक पर पतंग, धीरे-धीरे उतर क्षितिज से, धूप सा तन दीप सी मैं, नीर भरी दुख की बदली |

पुरस्कारों से समानित किया गया
१९७९ :साहित्य अकादेमी फेल्लोव्शिप
१९८२ :ज्नंपिथ पुरस्कार
१९५६ :पदम् भूषण
१९८८ :पदम विभूषण

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Akshaya Tritiya , also known as Akha Teej is a Hindu and Jain holy day, that falls on the third Tithi (Lunar day) of Bright half (Shukla Paksha) of Hindi month of Vaishakha.
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Navratri, Navaratri or Navarathri is a Hindu festival of worship and dance. The word Navaratri literally means nine nights in Sanskrit, nava meaning nine and ratri meaning nights. During these nine nights and ten days, nine forms of Shakti Devi are worshipped.

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