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Home Leaders 10 Jul 2026 माखनलाल सरकार की जीवनी
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माखनलाल सरकार की जीवनी

भाजपा के सबसे वयोवृद्ध कार्यकर्ता माखनलाल सरकार की जीवनी। जानें 1952 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ उनकी गिरफ्तारी, उत्तर बंगाल में पार्टी विस्तार और मई 2026 में पीएम मोदी द्वारा मिले ऐतिहासिक सम्मान के बारे में।

Jul 10, 2026, 9:58 am IST
माखनलाल सरकार की जीवनी

Makhanlal Sarkar with Modi

परिचय और वैचारिक जड़ें

श्री माखनलाल सरकार स्वतंत्रता के बाद के राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़े भारत के सबसे शुरुआती और सम्मानित जमीनी नेताओं में से एक हैं। एक अखंड राष्ट्र के दृष्टिकोण से गहराई से प्रेरित होकर, उन्होंने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विकल्प को बुनियादी स्तर से खड़ा करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। वे भारतीय जनसंघ के दौर से लेकर आधुनिक भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच एक महत्वपूर्ण वैचारिक कड़ी रहे हैं।।

ऐतिहासिक 1952 का कश्मीर आंदोलन

माखनलाल सरकार के जीवन का एक निर्णायक मोड़ वर्ष 1952 में आया। वे जम्मू-कश्मीर के पूर्ण विलय की मांग और परमिट व्यवस्था के विरोध में भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले। कश्मीर में भारतीय राष्ट्रीय तिरंगा फहराने के प्रयास के दौरान उन्हें डॉ. मुखर्जी के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था।

उत्तर बंगाल में संगठन का विस्तार

1980 में भाजपा की स्थापना के बाद, सरकार जी को महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गईं। उन्होंने उत्तर बंगाल के प्रमुख जिलों जैसे पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग के लिए संगठनात्मक समन्वयक (Organizational Coordinator) के रूप में कार्य किया। अपनी अद्भुत संगठनात्मक क्षमता के दम पर उन्होंने मात्र एक वर्ष के भीतर लगभग 10,000 सक्रिय सदस्यों को पार्टी से जोड़ा। वर्ष 1981 से उन्होंने लगातार सात वर्षों तक जिला अध्यक्ष के रूप में सेवा की, जो पार्टी के शुरुआती वर्षों में एक बड़ा मील का पत्थर था।

ऐतिहासिक सम्मान और विरासत (मई 2026)

98 वर्ष की आयु में, माखनलाल सरकार पश्चिम बंगाल में भाजपा के सबसे वयोवृद्ध जीवित कार्यकर्ता हैं। 9 मई 2026 को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल की पहली भाजपा सरकार के ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच पर उनका विशेष सम्मान किया। एक बेहद भावुक क्षण में, पीएम मोदी ने उनके दशकों के निस्वार्थ संघर्ष और मौन सेवा को नमन करते हुए मंच पर उनके पैर छुए और आशीर्वाद लिया।

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