अमेरिका ने ईरान पर की 11वीं रात एयर स्ट्राइक
एक महासागर जो युद्ध का मैदान बन चुका है
लगातार 11 रातों तक चले अमेरिकी और पश्चिमी गठबंधन के हवाई हमलों ने मध्य पूर्व की अस्थिरता को नई ऊँचाई दी है। ये हमले शुरू तो हूती विद्रोहियों के ठिकाने ध्वस्त करने के उद्देश्य से हुए थे, लेकिन इस क्रूर कार्रवाई ने क्षेत्र में एक भयंकर जवाबी प्रतिक्रिया (Counter-Response) को जन्म दिया है, जिसने संघर्ष को अब केवल यमन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे ईरान और वैश्विक व्यापार मार्गों तक विस्तारित कर दिया है।
यह केवल बमबारी का सिलसिला नहीं है; यह दुनिया के सबसे ज्वलंत भू-राजनीतिक टकरावों का मंच बन चुका है।
पश्चिमी गठबंधन का भीषण आक्रमण (हूती पर प्रहार)
समय: 11वीं रात गंतव्य: यमन के मुख्य हूतिया ठिकाने मकसद: अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्गों को सुरक्षित करना।
लाल सागर से गुजरने वाले अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर हूती विद्रोहियों द्वारा किए जा रहे लगातार हमलों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को ठप करने की कगार पर ला दिया था। इस संकट को देखते हुए, अमेरिकी और ब्रिटिश वायु सेना ने एक अभूतपूर्व और निरंतर सैन्य अभियान शुरू किया।
मध्य रात्रि के आसमान में, अमेरिकी F/A-18 सुपर हॉर्नेट और ब्रिटिश टाइफून लड़ाकू विमानों का झुंड गरजता हुआ यमन के आसमान में दिखाई दिया। यह 11वीं रात थी जब पश्चिमी ताकतें हूतियों के ठिकानों को लक्ष्य बना रही थीं। पेंटागन के अनुसार, इस ऑपरेशन का मुख्य लक्ष्य हूतियों की लड़ाकू क्षमता की रीढ़ तोड़ना था।
लड़ाकू विमानों ने लेजर-गाइडेड बम और सटीक मिसाइलों की बौछार यमन के रणनीतिक शहरों—जैसे सनाथ (कमांड सेंटर), होदेइदा (बंदरगाह), और ताइज़ (हथियारों के गोदाम)—पर की। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) ने दावा किया कि इस भीषण बमबारी में हूतियों के भूमिगत बंकरों, वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defense Systems) और मिसाइल लॉन्चिंग पैड को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया गया।