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'नमो ग्रीन रेल' की रीढ़: जींद ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट और आत्मनिर्भर ऊर्जा आपूर्ति

जानिए हरियाणा के जींद में बने भारत के पहले रेल ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट की उत्पादन क्षमता, 1MW इलेक्ट्रोलाइज़र और कैस्केड रिफ्यूलिंग सिस्टम की पूरी कार्यप्रणाली।

Published on: 21 Jul 2026

🏭 'नमो ग्रीन रेल' की रीढ़: जींद ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट और आत्मनिर्भर ऊर्जा आपूर्ति

नमो ग्रीन रेल की सफलता के पीछे केवल एक अत्याधुनिक ट्रेन नहीं है, बल्कि एक पूरी तरह से आत्मनिर्भर और स्वदेशी ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली है। इस ट्रेन को 24 घंटे बिना किसी रुकावट के निर्बाध ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए, हरियाणा के जींद में भारत का पहला समर्पित ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और रिफ्यूलिंग प्लांट स्थापित किया गया है। यह प्लांट न केवल एक सुविधा केंद्र है, बल्कि यह 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक विशाल कदम है।

🚀 प्लांट की क्षमता और ऑपरेशनल शक्ति

यह अत्याधुनिक संयंत्र 'नमो ग्रीन रेल' को वैश्विक मानकों के अनुरूप ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम है:

विशेषता विवरण औद्योगिक महत्व इलेक्ट्रोलाइज़र क्षमता 1 मेगावाट (MW) PEM इलेक्ट्रोलाइज़र उच्च दक्षता पर जल विभाजन। दैनिक उत्पादन क्षमता प्रतिदिन लगभग 430 किलोग्राम शुद्ध ग्रीन हाइड्रोजन (H₂) बड़े पैमाने पर ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करता है। रिफ्यूलिंग गति अत्याधुनिक कैस्केड रिफ्यूलिंग सिस्टम मात्र 15 से 20 मिनट के भीतर ट्रेन के सभी सिलेंडरों को पूरी तरह से रिचार्ज करना। स्वदेशीकरण पूरी प्रक्रिया स्वदेशी प्रौद्योगिकी और उपकरणों पर आधारित। ऊर्जा सुरक्षा और स्थानीय औद्योगिक विकास।

🧪 ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन प्रक्रिया: यह कैसे काम करता है?

इस प्लांट में उत्पादित हाइड्रोजन को 'ग्रीन' (हरा) कहा जाता है क्योंकि इसका निर्माण पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त और अक्षय स्रोतों का उपयोग करके होता है।

✅ 1. सौर ऊर्जा का स्रोत (Solar Power Input): प्लांट को चलाने के लिए आवश्यक पूरी बिजली रूफटॉप सोलर पैनलों और ग्रिड से आने वाली प्रमाणित रिन्यूएबल (हरित) बिजली से ली जाती है। यह पूरी प्रक्रिया को कार्बन-मुक्त बनाती है।

✅ 2. पानी का विद्युत अपघटन (Water Electrolysis):

  1. हरित बिजली का उपयोग करके, इलेक्ट्रोलाइज़र के भीतर साधारण पानी ($\text{H}_2\text{O}$) के अणुओं को तोड़ा जाता है।
  2. इस रासायनिक प्रक्रिया से शुद्ध हाइड्रोजन ($\text{H}_2$) और ऑक्सीजन ($\text{O}_2$) गैसें अलग हो जाती हैं।
  3. वातावरण के लिए उपयोगी ऑक्सीजन को तुरंत वायुमंडल में छोड़ दिया जाता है।

✅ 3. शुद्धिकरण और उच्च दबाव भंडारण:

  1. उत्पादित हाइड्रोजन गैस को डी-ऑक्सीडाइज़र और ड्रायर यूनिट से गुजारा जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि गैस की शुद्धता 99.99% हो, जो कि फ्यूल सेल इंजन के लिए आवश्यक मानक है।
  2. शुद्ध गैस को उच्च दबाव पर विशाल टैंकों में संग्रहित किया जाता है, जिससे यह तुरंत ट्रेनों को आपूर्ति के लिए तैयार रहती है।

सारांश:

यह स्वदेशी सेटअप न केवल ट्रेनों को ईंधन प्रदान करता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि देश में हाइड्रोजन ऊर्जा का आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित हो सके। यह आत्मनिर्भरता भारत की हरित परिवहन लक्ष्यों (Green Mobility Goals) को मजबूती प्रदान करती है।