10 नवंबर को मनाया जाता है विश्व टीकाकरण दिवस

Aazad Staff

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गर्भवती महिला को रोगों से बचने के लिए टीके लगवाना आवश्यक

देश में राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत 15 वर्ष तक की आयु के बच्चों तथा तथा गर्भवती महिलाओं को गंभी रोगों से बचने के लिए टीके दिए जाते हैं इनमें तपेदिक (टी.बी) डिप्थीरिया, परटूसिस (काली खाँसी), टिटनेस, खसरा (मीजल्स) तथा पोलियो (पोलियोमाइटिस) आदि शामिल है।

छोटे बच्चों को  सही समय पर इन सभी रोगों से बचने के लिए वैक्सीन्स की पर्याप्त खुराकें दी जाती है जिसके तहत इन रोगों से बचा जा सकता है।

भविष्य में घातक व अपंग करने वाली बीमारियों से बचने के लिए बच्चे को टिटनेस टॉक्साइड वैक्सीन के अतिरिक्त अन्य वैक्सीन्स लगाना बेहद ही आवश्यक है।

गर्भवती महीला को टिटनेस टॉक्साइड (टी.टी) के 2 टीके लगवाने चाहिए| ये टीके गर्भावस्था में कभी भी लगवाए जा सकते हैं, हालाँकि समय से पहले हो जाने वाले प्रसव तथा गर्भपात को कवर करने के लिए इन्हें गर्भावस्था के शुरू में लगवाना अधिक लाभकारी होता है|  टीकों के बीच 4-6 सप्ताह का अंतर अवश्य होना चाहिए।   अगर किसी स्त्री ने पहले गर्भ में टी.टी. के टीके लगवाए हैं और पहले गर्भ के 5 वर्ष के भीतर वह दूसरा गर्भधारण कर लेती है तो दूसरे गर्भ टी.टी. का केवल एक टीका काफी है|  टीका प्रसव की अपेक्षित तिथि से 4-6 सप्ताह पूर्व लगवाना चाहिए|

अगर पहले व दूसरे गर्भ के बीच 5 वर्ष अधिक का अंतर है तो दूसरे गर्भ में – पहले गर्भ की भांति 2 टीके लगवाने चाहिए| अगर पहले गर्भ में लगाए गए टीकों का सही रिकार्ड उपलब्ध नहीं है तो यही बेहतर होगा की दूसरे गर्भ में भी 2 टीके लगवाए जायें चाहे वह गर्भ, पहले गर्भ के 5 वर्ष के समय के भीतर ही क्यों न हुआ हो| ये नियम बाद के गर्भधारण पर भी लागू होते हैं|

विश्व टीकाकरण दिवस टीका निवारणीय रोगों के खिलाफ समय पर टीकाकरण करवाने के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। हाल के एसआरएस आकलनों के अनुसार भारत में पाँच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर में कमी आई है और यह 2005 के 1000 में 75 की तुलना में घटकर 2014 में 1000 में 45 तक आ गयी है। उन्होंने बताया कि प्रतिरक्षण देश में शिशु मौतों को कम करने में एक प्रमुख युक्ति रही है।

टीकाकरण और प्रतिरक्षण के बीच अंतर? टीका देने की प्रक्रिया को टीकाकरण कहा जाता है। जबकि शरीर की रक्षात्मक प्रतिक्रिया के विकास के लिए टीका देने की पूरी प्रक्रिया की शुरुआत को प्रतिरक्षण कहा जाता है।

रोगियों के लिए स्मरण योग्य संकेत

एक सुई : एक सिरिंज का केवल एक ही बार उपयोग किया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करें।     •   यह सुनिश्चित करें कि सुई और सिरिंज दोनों को उपयोग के बाद नष्ट कर दिया जाएँ। सुई बदलना और सिरिंज का पुन: उपयोग करना अत्यधिक असुरक्षित होता है। यह प्रक्रिया रोग संचारित कर सकती हैं।     •   दिशा निर्देशों के अनुसार टीकाकरण अनुसूची का पालन करें। अपने प्रतिरक्षण रिकॉर्ड की जानकारी अवश्य रखें तथा किसी भी प्रकार के टीकाकरण से पहले इस जानकारी को अपने    साथ लेकर ज़रूर जाएँ।     •    किसी भी प्रकार के टीकाकरण से पहले हमेशा अपने चिकित्सक से परामर्श करें

 

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