लोकसभा में बहुमत से पारित हुआ तीन तलाक विधेयक

Aazad Staff

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लोकसभा में घमासान व हंगामे के बीच आखिरकार तीन तलाक बिल गुरुवार को पारित कर दिया गया। इस बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष में आरोप प्रत्यारोप का शिलशिला कायम रहा। बता दें कि इससे पहले दिसबंर 2017 में भी लोकसभा से तीन तलाक विधेयक को मंजूरी मिली थी हालांकि राज्यसभा में इसे पारित नहीं किया जा सका था।

लोकसभा में तीन तलाक विधेयक को गुरुवार पारित कर दिया गया इस दौरान मुस्लिम संगठनों ने इस पर मिली जुली प्रतिक्रिया दी कुछ ने तीन तलाक विधेयक का समर्थन किया है तो कुछ ने इसे ‘बेहद खतरनाक’ करार देते हुए इसका विरोध किया। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) की कार्यसमिति के सदस्य एस.क्यू.आर. का कहना है कि इस विधेयक की फिलहाल कोई जरुरत नहीं थी, इसे आगामी लोकसभा चुनाव के मद्दे नजर पारित किया गया है।

तीन तलाक विधेयक को लेकर कांग्रेस और एआईएडीएमके ने गुरुवार को लोकसभा में वॉकआउट कर इसका विरोध जताया। जबकि समाजवादी पार्टी के कई सदस्यों ने वोटिंग के दौरान हिस्सा नहीं लिया। बता दें कि लोकसभा में इस विधेयक को लेकर वोटिंग कराई गई जिसमें 256 सांसदों में से 245 सदस्यों ने इसके पक्ष में मतदान किया, जबकि 11 सदस्यों ने इसके खिलाफ अपना वोट दिया।

वहीं तीन तलाक विधेयक को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी खुद को मुस्लिम महिलाओं की हिमायती के तौर पर पेश कर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है।

वहीं इस विधेयक का कई महिला संगठन ने स्वागत किया। भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की सदस्य जाकिया सोमन ने विधेयक का स्वागत किया। जाकिया  ने हिंदू विवाह अधिनियम की तर्ज पर मुस्लिम विवाह अधिनियम की मांग की है जो बहुविवाह और बच्चों के संरक्षण जैसे मुद्दों से निपटेगा।

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने भी तीन तलाक विधेयक बिल के पारित होने की सहमती जताई। एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा, ‘‘हम इस कदम का स्वागत करते हैं। इस विधेयक के अभाव में हमने मुस्लिम महिलाओं की पीड़ा देखी है और काफी समय से इसे पारित किये जाने की वकालत करते रहे हैं।

बहरहाल लोकसभा से तीन तलाक को अपराध ठहराने वाले बिल को मंजूरी दिलाने के बाद सरकार के लिए अब इसे राज्यसभा से पारित कराना चुनौती पूर्ण है। बता दें कि उच्च सदन में एनडीए की बहुमत नहीं है।

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