पुलवामा हमले के बाद भारत ने छीना पाकिस्‍तान से MFN का दर्जा

Aazad Staff

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पुलवाम में आत्मघाती हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन(MFN) का दर्जा छीन लिया है। बता दे कि भारत ने पाकिस्तान को ये दर्जा १९९६ में दिया था।

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में गुरुवार भीषण आतंकी हमले में ४४ से ज्यादा सीआरपीएफ जवानों की शहादत के बाद भारत ने पाकिस्तान को हड़ा झटका दिया है। भारत ने 'मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन)' का दर्जा वापस ले लिया है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर हुई 'कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्यॉरिटी' में पाकिस्तान को मिले इस दर्जे को २२ वर्षों बाद खत्म करने का फैसला किया गया। बता दें कि इसकी जानकारी वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दी है।

क्या है मोस्‍ट फेवर्ड नेशन MFN यानि मोस्ट फेवर्ड नेशन एक खास दर्जा होता है। यह दर्जा व्यापार में सहयोगी राष्ट्रों को दिया जाता है। इसमें MFN राष्ट्र को भरोसा दिलाया जाता है कि उसके साथ भेदभाव रहित व्यापार किया जाएगा। डब्ल्यूटीओ के नियमों के अनुसार भी ऐसे दो देश एक-दूसरे से किसी भी तरह का भेदभाव नहीं कर सकते। इसमें यह भी कहा गया है कि अगर व्यापार सहयोगी को खास स्टेटस दिया जाता है तो WTO के सभी सदस्य राष्ट्रों को भी वैसा ही दर्जा दिया जाना चाहिए।

इसका मतलब केवल इतना है कि व्यापार में कोई भी देश जिसे ये दर्जा मिला हो वो किसी दूसरे देश की तुलना में घाटे में नही रहेगा। जब किसी देश को यह दर्जा दिया जाता है तो उससे उम्मीद की जाती है कि वह शुल्कों में कटौती करेगा। अलावा उन दोनों देशों के बीच कई वस्तुओं का आयात और निर्यात भी बिना किसी शुल्क के होता है। भारत ने पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा १९९६  में दिया था। लेकिन पाकिस्तान ने आज तक भारत को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा नहीं दिया है।

क्या फायदा? एमएफएन स्टेटस का इस्तेमाल लोन अग्रीमेंट और कमर्शल ट्रांजैक्शन में भी होता है। लोन अग्रीमेंट के तहत किसी एमएफएन दर्जा प्राप्त देश के लिए तय ब्याज दर से कम दर किसी सामान्य देश को ऑफर नहीं किया जाएगा। वहीं, कमर्शल ट्रांजैक्शन के मामले में मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा प्राप्त देश से सस्ती डील किसी दूसरे देश को नहीं दी जाएगी।

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