एम्स एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा में पंजीकरण करने के लिए अब दो बार मिलेंगे मौके

Aazad Staff

Nation

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) की एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा के लिए अब अभ्यर्थी को दो बार पंजीकरण का मौका दिया जाएगा। इसके लिए एम्स ने प्रॉस्पेक्टिव एप्लीकेंटस एडवांस रजिस्ट्रेशन(पीएएआर) की सुविधा शुरू की है। 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में धाखिला लेने वाले छात्रों के लिए अच्छी खबर है। अब एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा के पंजीकरण के लिए दो बार अभ्यर्थियों को पंजीकरण का मौका दिया जाएगा। बता दें कि इस तरह का बदलाव पहली बार किया गया है। पहले अभ्यर्थी को मूल पंजीकरण कराना होगा और इसके बाद अंतिम पंजीकरण होगा। एम्स ने इसके लिए प्रॉस्पेक्टिव एप्लीकेंटस एडवांस रजिस्ट्रेशन (पीएएआर) की सुविधा शुरू की है।

बता दें कि हर साल शैक्षिक योग्यता के अलावा अन्य विवरण सही ढंग से नहीं भरने जाने के कारण बड़ी तादाद में अभ्यर्थियों के आवेदन को निरस्त कर दिए जाता था। लेकिन अब एडवांस रजिस्ट्रेशन से इस तरह की समस्याओं से छूटकारा मिलेगा। परीक्षा में सम्मलित होने के इच्छुक अभ्यर्थी, प्रथम चरण में छह माह पूर्व ही अपना मूल विवरण भरकर फोटो अपलोड कर देंगे। त्रुटि सुधार का भी उन्हें पर्याप्त समय दिया जाएगा। पंजीकरण स्वीकार होने पर न केवल इसकी सूचना बल्कि आइडेंटिफि केशन नंबर भी अभ्यर्थी को दिया जाएगा। इस नंबर पर उसका पूरा डाटा स्टोर होगा। अंतिम समय में अभ्यर्थी पर अनावश्यक दबाव नहीं रहेगा। यह भी बता दें कि मूल पंजीकरण के लिए किसी तरह का शुल्क नहीं देना होगा।

एम्स द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि मूल पंजीकरण परीक्षा से एक निश्चित समय पूर्व बंद कर दिया जाएगा। आवेदक जिन्होंने मूल पंजीकरण पूर्ण और इसे स्वीकार कर लिया गया है। यह निर्णय उसका होगा कि वह इस सत्र परीक्षा में सम्मलित होगा या बाद में। अंतिम पंजीकरण की प्रक्रिया में शामिल न होने पर भी उसका डाटा आगे की परीक्षाओं के लिए भी वैध रहेगा। यहां बता दें कि  एम्स एमबीबीएस के लिए नवंबर के दूसरे सप्ताह से ही पहले चरण के मूल पंजीकरण शुरू हो जाएंगे। इसके दूसरे चरण के अंतिम पंजीकरण फरवरी 2019 में होंगे।

Latest Stories

Also Read

Biography of Bhaskaracharya: Discoveries, Calculus & Gravity Laws

Explore the life and achievements of ancient Indian mathematician Bhaskaracharya (Bhaskara II). Read about Siddhanta Shiromani, Lilavati, division by zero, and early calculus concepts.

सिंधु-सरस्वती सभ्यता का ४५०० साल पुराना पासा और भारत की जीवंत विरासत

सिंधु-सरस्वती सभ्यता के ४,५०० साल पुराने टेराकोटा पासे की खोज और ऋग्वेद-अथर्ववेद से इसके संबंध के माध्यम से जानिए कैसे भारत आज भी एक अटूट सांस्कृतिक चेतना के रूप में जीवित है।

A 4,500-Year-Old Dice: Proof of the Enduring Continuity of the Indus-Saraswati Civilization

Beyond ruins and geography, India's heritage thrives through living customs, symbols, and an unbroken cultural consciousness. Read about this extraordinary ancient find.

CORONA A VIRUS? or our Perspective?

A Life-form can be of many forms, humans, animals, birds, plants, insects, etc. There are many kinds of viruses and they infect differently and also have a tendency to pass on to others.