दिल्ली में बिजली क्रांति: स्मार्ट सबस्टेशन और सोलर अभियान की शुरुआत, जानें पूरी योजना
दिल्ली का बिजली ढांचा अब एक बड़े आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इस महत्वाकांक्षी बदलाव को लागू करने के लिए दिल्ली के बिजली मंत्री आशीष सूद और केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने संयुक्त रूप से पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर क्षेत्र में कई बड़ी परियोजनाएं शुरू की हैं।
इस बड़े ऊर्जा रूपांतरण से जुड़े तीन मुख्य स्तंभ और उनके विवरण निम्नलिखित हैं:
💡 1. देश का पहला ‘स्मार्ट पैड-माउंटेड सबस्टेशन’
गांधी नगर जैसे घनी आबादी वाले बाज़ार में, जहां जगह की कमी सबसे बड़ी चुनौती है, यह अत्याधुनिक सबस्टेशन एक वरदान साबित हुआ है।
- स्थान और दक्षता: यह 2x1,000 kVA क्षमता वाला सबस्टेशन न केवल कार्यशील है, बल्कि पारंपरिक सबस्टेशनों की तुलना में यह 80 प्रतिशत कम जगह घेरता है। इससे दिल्ली में ज़मीन की कमी वाले क्षेत्रों में भी बिजली ग्रिड को आसानी से मजबूत किया जा सकेगा।
- स्मार्ट मॉनिटरिंग: यह सबस्टेशन एडवांस SCADA तकनीक से लैस है। यह तकनीक बिजली ग्रिड की रियल-टाइम निगरानी करती है, खराबी (फॉल्ट) का तुरंत पता लगाती है, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिजली कटने पर इसे स्वचालित रूप से और बहुत तेज़ी से बहाल कर सकती है।
☀️ 2. 'सोलराइज ईस्ट' (Solarize East) - हरित ऊर्जा का अभियान
यह पहल लोगों को सक्रिय रूप से ऊर्जा के क्षेत्र में शामिल करने पर केंद्रित एक सामुदायिक-संचालित कार्यक्रम है। इसे 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' और दिल्ली सोलर पॉलिसी के तहत लागू किया गया है।
- दोहरा लाभ: इस अभियान का मुख्य लक्ष्य उपभोक्ताओं को अपनी छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है। उपयोगकर्ता न केवल अपनी जरूरत की बिजली मुफ्त प्राप्त कर सकेंगे, बल्कि अतिरिक्त बिजली को ग्रिड को बेचकर आय भी कमा सकेंगे।
- सरल प्रक्रिया: RWA (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन), आम जनता और स्थानीय प्रतिनिधियों के लिए एक मंच तैयार किया जाएगा, जहां सोलर पैनल लगाने, सरकारी सब्सिडी का लाभ लेने और नेट मीटरिंग की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। यह शुरुआत दक्षिण-पूर्वी दिल्ली और अन्य वितरण क्षेत्रों से होगी।
💰 3. ₹1,427 करोड़ का रिकॉर्ड निवेश और क्षमता प्रदर्शन
इस संपूर्ण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार ने केवल एक वर्ष के भीतर ₹1,427 करोड़ का भारी पूंजी निवेश (Capital Expenditure) किया है।
- रिकॉर्ड प्रदर्शन: अधिकारियों के अनुसार, इस मजबूत बुनियादी ढांचे के कारण दिल्ली ने अपनी अब तक की सबसे अधिक रिकॉर्ड पीक पावर डिमांड (8,748 मेगावाट) को बिना किसी बड़ी कटौती के सफलतापूर्वक पूरा किया।