✨ विकसित भारत का शंखनाद: लखनऊ में 'माय भारत' सम्मेलन और युवाओं का नया संकल्प
लखनऊ, 17 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान उस सुबह किसी उत्सव से कम नहीं लग रहा था। हर कोने से देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवा स्वयंसेवकों के चेहरे पर केवल उत्साह नहीं, बल्कि एक गहरा संकल्प और एक अदम्य ऊर्जा दिखाई दे रही थी। यह ऊर्जा मात्र एक कार्यक्रम की नहीं, बल्कि भारत के स्वर्णिम भविष्य—'विकसित भारत @ 2047'—के साकार होते सपने की थी। केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित 'माय भारत राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक महा-सम्मेलन' ने भारत के अगले शताब्दी वर्ष के लिए एक बेहद सशक्त और भव्य खाका प्रस्तुत किया।
🏛️ संकल्प भूमि बना लखनऊ: युवा शक्ति का संगम
समारोह का आरंभ दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगान के अत्यंत गरिमामय माहौल के साथ हुआ, जिसने उपस्थित सभी लोगों के मन में देशभक्ति की एक नई लहर दौड़ा दी। मंच पर केंद्रीय युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया की उपस्थिति ने इस महा-सम्मेलन को और अधिक महत्ता प्रदान की। उनकी अध्यक्षता में, रक्षा राज्य मंत्री श्री निखिल खडसे, उत्तर प्रदेश के खेल मंत्री श्री गिरीश चंद्र यादव और विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनकर राष्ट्रीय दायित्व की भावना को बल दिया।
सम्मेलन स्थल पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 1,500 से अधिक 'माय भारत राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक' (NYVs) उपस्थित थे। जब डॉ. मांडविया ने युवाओं को सम्बोधित करना प्रारंभ किया, तो पूरा विशाल हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा, मानो स्वयं देश की विजय का उद्घोष हो रहा हो।
केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने भावुक होकर कहा:
"मेरे प्यारे युवा साथियों! आप केवल भारत के भविष्य नहीं हैं; आप इस देश के वर्तमान शिल्पकार हैं, आज के निर्माता हैं। जब यह महान राष्ट्र 2047 में अपने स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष का गौरवशाली पर्व मनाएगा, तब इस महा-समर्थ भारत की बागडोर, देश का वास्तविक संचालन, आज के संकल्पशील युवा हाथों में होगा। यह 'माय भारत' (MY Bharat) पोर्टल केवल एक तकनीकी मंच नहीं है; यह भारत के हर युवा के सपनों को पंख देने वाला एक विशाल लॉन्चपैड है, एक संकल्प से सिद्धि का माध्यम है।"
🏆 'नेशन फर्स्ट चैलेंज': जमीनी स्तर के परिवर्तन के शिल्पकार
सम्मेलन का सबसे मार्मिक और प्रेरणादायक पल वह पड़ा जब उन युवाओं को मंच पर बुलाया गया जिन्होंने 'देश पहले' (Nation First Challenge) की भावना को केवल शब्दों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अपनी जीवनशैली बना दिया। केंद्र सरकार के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर देश की सेवा के लिए लीक से हटकर काम करने वाले शीर्ष 5 विजेताओं को केंद्रीय मंत्रियों के हाथों सम्मानित किया गया।
इन युवा स्वयंसेवकों ने अपनी प्रतिभा और जमीनी प्रयास से डिजिटल साक्षरता के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में क्रांति ला दी, स्वास्थ्य जागरूकता के जरिए समुदायों को सशक्त बनाया और महिला उत्थान के अद्वितीय मॉडल प्रस्तुत किए। उन्हें देखते ही, हॉल में उपस्थित हर एक स्वयंसेवक की आँखों में एक ही बात झलक रही थी—स्वयं भी देश के लिए कुछ ऐसा महा-परिवर्तन करना है। यह सम्मान प्रमाण नहीं था, बल्कि एक दायित्वबोध का आह्वान था।
🎙️ प्रमुख वक्ताओं का मार्गदर्शन: देश के विकास में युवाओं की भूमिका
लखनऊ में आयोजित 'माय भारत राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक महा-सम्मेलन' के उद्घाटन सत्र और उसके बाद आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार में उपस्थित मुख्य वक्ताओं ने देश के विकास में युवाओं की भूमिका को लेकर न केवल उत्साहवर्धन किया, बल्कि अत्यंत ठोस वैचारिक आधार भी प्रस्तुत किया। विभिन्न मंचों से आए विशेषज्ञों और मंत्रियों के विचारों ने स्पष्ट कर दिया कि युवा अब केवल ऊर्जा का स्रोत नहीं, बल्कि विकास का प्रमुख स्तंभ हैं।
यहाँ प्रमुख वक्ताओं द्वारा दिए गए मुख्य विचारों का सार प्रस्तुत है:
👥 केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया: अपने मुख्य भाषण में, डॉ. मांडविया ने "युवा विकास के लिए दृष्टिकोण, शासन प्राथमिकताएं और रणनीतिक अनिवार्यताएं" जैसे विषय पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने बार-बार दोहराया कि युवा भारत की सबसे बड़ी पूँजी हैं:
- युवा ही असली शक्ति: उन्होंने आंकड़े देते हुए जोर दिया, "भारत की 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। युवा हमारी शक्ति हैं, हमारा वर्तमान हैं, हमारा गौरव हैं, और हमारा अदम्य संकल्प हैं। यही देश की वास्तविक ऊर्जा और शक्ति हैं।"
- समग्र विकास का मंच: उन्होंने बताया कि 'माय भारत' पोर्टल केवल एक ऑनलाइन टूल नहीं, बल्कि देश के युवाओं के लिए एक व्यापक 'सिंगल प्लेटफॉर्म' (एकल मंच) बन चुका है। यह युवाओं को नेतृत्व, स्वयंसेवा, व्यावहारिक शिक्षा और आधुनिक करियर मार्गदर्शन के अनंत अवसरों से जोड़ता है।
- सक्रिय भागीदार: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन को रेखांकित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार युवाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण में सक्रिय साझेदार और अग्रणी लीडर मानती है।
👥 युवा कार्यक्रम और खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे: श्रीमती खडसे ने सम्मेलन और आगामी चिंतन शिविर के लिए एक स्पष्ट रणनीतिक एजेंडा सेट किया, जिसका केंद्र बिंदु जमीनी स्तर पर भागीदारी रही:
- डिजिटल क्रांति का माध्यम: उन्होंने स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि वे डिजिटल तकनीकों और सरकारी नीतियों को देश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति और ग्रामीण परिवेश तक पहुँचाने का सबसे सशक्त माध्यम बनें।
- नीति निर्माण में भागीदारी: उन्होंने युवाओं को प्रोत्साहित किया कि वे आगामी 'चिंतन शिविर' की 'नीति प्रयोगशालाओं' (Policy Labs) में अपने व्यावहारिक विचार साझा करें। ये सुझाव सीधे सरकार की आगामी 2026-27 की राष्ट्रीय कार्ययोजना में स्थान पाएँगे।
👨💼 युवा मामले विभाग की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल: डॉ. गोविल ने देश के संस्थागत ढांचे को मजबूत करने और युवाओं के जुड़ाव की निरंतरता पर ध्यान केंद्रित किया:
- सतत जुड़ाव पर जोर: उन्होंने राष्ट्र निर्माण में युवाओं के जुड़ाव को एक निरंतर और व्यवस्थित प्रक्रिया बनाने पर बल दिया।
- सशक्त इकोसिस्टम: सचिव ने स्पष्ट किया कि 'माय भारत पोर्टल' और 'राष्ट्रीय सेवा योजना' (NSS) के माध्यम से सरकार एक ऐसा सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) बना रही है, जिससे युवाओं के कौशल का सीधा और प्रत्यक्ष लाभ स्थानीय समुदायों को मिल सके।
🩺 प्रो. (डॉ.) शिव कुमार सरीन (कुलपति, ILBS): वेबिनार सत्र के दौरान मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. सरीन ने युवाओं के स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण पर विशेष ध्यान दिया:
- जागरूकता दूत का आह्वान: उन्होंने 'जागरूक जिगर: नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत' थीम पर बोलते हुए सचेत किया कि एक विकसित और उन्नत राष्ट्र के लिए युवाओं का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना परम आवश्यक है। उन्होंने सभी स्वयंसेवकों से देशव्यापी स्तर पर मादक पदार्थों के खिलाफ जागरूकता दूत (Ambassador) बनने का आह्वान किया।
🎯 विकसित भारत की कार्ययोजना: ठोस लक्ष्य और रणनीतिक पहल
सम्मेलन का उद्देश्य केवल जोशीले भाषण देना नहीं था, बल्कि अगले कुछ वर्षों के लिए राष्ट्रीय चेतना और कार्य के ठोस रोडमैप तैयार करना था। इस दौरान निम्नलिखित दो अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतियों पर गहन विचार-विमर्श हुआ:
१. राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान का शंखनाद: इस सम्मेलन में देश की युवा शक्ति को खोखला करने वाली ड्रग्स और नशीली लत के खिलाफ एक पूर्ण राष्ट्रव्यापी युद्ध का ऐलान किया गया। स्वयंसेवकों को यह वृहद जिम्मेदारी सौंपी गई कि वे अपने-अपने गाँव, कस्बे और स्थानीय परिसरों में जाकर जागरूकता के महायज्ञ आयोजित करें, ताकि युवा मन केवल सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर रहें।
२. विकसित भारत युवा नेता संवाद: यह एक अनूठा सत्र था, जहाँ युवाओं को सीधे नीति निर्माताओं (Policy Makers) के समक्ष अपने मौलिक और अभिनव विचारों को रखने का मंच मिला। युवा स्वयंसेवकों ने केवल समस्याओं की सूची नहीं दी, बल्कि देश की विभिन्न चुनौतियों के लिए 'समाधानों का खाका' भी प्रस्तुत किया, जो नीति-निर्माण प्रक्रिया के लिए अत्यंत मूल्यवान सिद्ध हुआ।
🧠 दो दिवसीय 'चिंतन शिविर': संवाद से अटल संकल्प तक
लखनऊ का यह महा-उत्सव केवल एक दिन का कार्यकर्म नहीं है। इसकी महत्ता अगले दो दिनों में भी जारी रहेगी। 18 और 19 जुलाई 2026 को यहाँ एक देशव्यापी 'राष्ट्रीय चिंतन शिविर' का आयोजन किया जा रहा है, जो इस संकल्प यात्रा को चरम पर ले जाएगा। इस शिविर को दो बौद्धिक और वैचारिक स्तंभों में बांटा गया है:
प्रथम चरण: संवाद से समाधान की ओर (Dialogue to Solutions): देश भर के युवा प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी एक ही मेज पर बैठकर यह विश्लेषण करेंगे कि सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ किस प्रकार 'पहुँच-योग्य' (Accessible) बनाया जा सकता है। चर्चा का केंद्र बिंदु तकनीकी समावेशन (Technological Inclusion) और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से 'आखिरी व्यक्ति' (Last Mile Connectivity) तक योजनाओं का निर्बाध हस्तांतरण करना होगा।
द्वितीय चरण: समाधान से संकल्प की ओर (Solutions to Commitment): अंतिम दिन, इन चिंतन शिविरों में सामने आए सर्वोत्तम, सबसे प्रभावी एवं व्यवहार्य समाधानों को विशेष 'नीति प्रयोगशालाओं' (Policy Labs) में एकीकृत किया जाएगा। ये समाधान सीधे वर्ष 2026-27 की केंद्रीय कार्ययोजना और प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PM Internship Plan) के विस्तृत रोडमैप का अभिन्न अंग बनेंगे।
🌟 निष्कर्ष: नेतृत्व का उदय, भारत का उदय
लखनऊ में आयोजित यह महा-सम्मेलन स्पष्ट रूप से यह घोषणा करता है कि भारत अब केवल 'युवा विकास' (Youth Development) के विचार से आगे निकलकर, एक 'युवाओं द्वारा संचालित विकास' (Youth-led Development) के युग में प्रवेश कर चुका है। जब ये 1,500 स्वयंसेवक अपने घरों को लौटेंगे, तो वे केवल एक प्रमाण पत्र लेकर नहीं जाएंगे; वे 2047 के उस स्वर्णिम, सशक्त और आत्मविश्वासी भारत को गढ़ने का एक ऐसा अटूट और ज्वलंत संकल्प लेकर जाएंगे, जो विश्व पटल पर एक नया मानदंड स्थापित करेगा।